जीवन में सुकून चाहिए तो दूसरों की मदद जरुर करें।

दोस्तों जीवन में हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए अपने हाथ जरुर आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि यही जीवन का असली आनंद है। हमे कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि इससे मेरा क्या फायदा या मैं किसी की मदद क्यों ही करूं। पेड़ देखिए वो खुद के लिए कुछ नहीं रखता फिर भी उसकी छाया, फल और हवा सबको सुख देती है, अगर हम भी प्रतिदिन किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सके तो वही मुस्कान हमारे भीतर भी प्रसन्नता भर देती है। इसलिए हमें हमेशा निस्वार्थ भाव से ही कर्म करना चाहिए।
निस्वार्थ कर्म ही योग है जब हम बिना किसी स्वार्थ के काम करते हैं तो वह काम ही ध्यान बन जाता है। तब हर दिन पूजा बन जाती है और हर पल साधना। दोस्तों, कभी-कभी जीवन में ऐसा समय भी आता है जब सब कुछ दूर चला जाता है। सब दूर चले जाते हैं। दोस्त, रिश्ते, भरोसे सब टूटते दिखते हैं, ऐसे में इंसान खुद को बेहद अकेला महसूस करने लगता है। तब हमें महसूस होता है कि हमारा सबसे बड़ा सहारा हमारे भीतर ही है। जब आप अपने भीतर के भगवान को पहचान लेते हैं तो बाहरी दुनिया की हर मुश्किल छोटी लगने लगती है।
जीवन में सुकून चाहिए तो दूसरों की मदद जरुर करें।
खुद पर विश्वास रखना यही आत्मबल है, जिसके पास आत्मविश्वास है उसके पास पूरी सृष्टि की ऊर्जा है। वो गिरता जरूर है लेकिन टूटता नहीं। इसके अलावा खुशी को पाने का सबसे सरल उपाय है आभार। हर सुबह जब आप आंखें खोलें तो सबसे पहले धन्यवाद करें इस स्वास के लिए, इस जीवन के लिए, इस अवसर के लिए जो कुछ आपके पास है, वही आपकी सबसे बड़ी पूंजी है, क्योंकि जो व्यक्ति ग्रेटफुल होता है, उसे कभी कमी नहीं लगती। अगर हम यह सीख लें कि कैसे हर परिस्थिति में मुस्कुराना है तो फिर कोई दुख हमें ज्यादा देर तक रोक ही नहीं सकता।
मनुष्य वही है जो परिस्थितियों से ऊपर उठकर भी स्थिर रह सके। जीवन में सुख-दुख, जीत, हार, सम्मान, अपमान आते जाते रहेंगे पर अगर आपका मन शांत है तो सब कुछ सहज लगेगा। जैसे समुद्र की गहराई हमेशा स्थिर रहती है, वैसे ही आत्मा भी शांत रहती है। बस हमें उससे जुड़ना सीखना है।
दोस्तों, मन और आत्मा के बीच की दूरी ही दुख की जड़ है। मन कहता है मुझे और चाहिए। आत्मा कहती है मैं पूर्ण हूं। जब आप आत्मा की बात सुनना सीखते हैं, तो मन का शोर अपने आप शांत हो जाता है, इसलिए हर सुबह जब आपकी नींद खुले तो खुद से कहें आज चाहे कुछ भी हो जाए मैं अपनी शांति नहीं खोऊंगा या खोऊंगी। यह एक प्रण आपके जीवन को पूरी तरीके से बदल देगा क्योंकि जब आप खुद में खुशी ढूंढ लेते हैं तो आपको बाहरी प्रभाव से भी कुछ असर नहीं होता।
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