प्रेमानंद जी महाराज के पांच पांडव शिष्यों के बारे में जानकारी।

हैल्लो दोस्तों नमस्कार पिछले आर्टिकल में मैंने आपको देश ही नही संसार के सबसे बड़े संत श्री प्रेमानंद जी महाराज जी का जीवन परिचय बताया यदि आपने वो आर्टिकल नही पढ़ा तो पहले वो पढ़ लीजिये क्योंकि आज का आर्टिकल उसी से सम्बंधित है।
जब भी हम वृंदावन की गलियों में महापुरुष महान संत प्रेमानंद जी महाराज जी को देखते हैं तो उनके आसपास हमें कुछ विशेष संत जो हैं साए की तरह साथ चलते दिखाई देते हैं, क्या आप जानते हैं कि ये संत कौन हैं?
बताते हैं कि ये पांच पांडव जो हैं जो विशेष व्यक्तित्व उनके साए के रूप में उनके साथ चलते हैं यह कौन है? यह वह पवित्र आत्माएं हैं जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे अवसर, करियर, नौकरी, धन, सुख सुविधाएं सबको त्याग दिया अपने गुरु की सेवा करने के लिए।
सिर्फ एक ही लक्ष्य था गुरु सेवा और भगवान श्री कृष्ण की राधा रानी जी की भक्ति करना।
आज जब कुछ थोड़े से लाभ के लिए, पैसों के लिए लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं को भूल जाते हैं, नकार देते हैं ऐसे में इन शिष्यों का जीवन हम सबके लिए बहुत बड़ी इंस्पिरेशन है।
आइए जानते हैं इन अद्भुत शिष्यों की कहानियां।

सबसे पहले बात करते हैं नवल नागरी बाबा जी की जिनका सफर रहा है सैनिक से संत बनने का। पंजाब के पठानकोट के रहने वाले नवल नागरी बाबा जो भारतीय सेना में 9 वर्षों तक सेवा दे चुके हैं। कारगिल जैसे कठिन क्षेत्र में उनकी तैनाती रही।
प्रेमानंद जी महाराज के पांच पांडव शिष्यों के बारे में जानकारी।
अनुशासन से भरा जीवन रहा लेकिन 2016 में उनकी भेंट होती है प्रेमानंद जी महाराज जी से और महाराज जी के प्रवचन जो हैं नवलना नागरी बाबा के हृदय को ऐसा स्पर्श करते हैं कि वो सेनामें जो नौकरी कर रहे थे उस नौकरी को छोड़ देते हैं और साधु का जीवन वैराग्य का जीवन जो है एक संत का जीवन जो है उसे अपना लेते हैं।
आज वो राधा केलीकुंज आश्रम की व्यवस्थाओं में इंपॉर्टेंट रोल प्ले कर रहे हैं और प्रवचनों में जो भक्त हैं उनके जो प्रश्न है उनको पढ़कर के महाराज जी को सुनाते हैं।
#2. श्यामाशरण बाबा जी

रिश्ते से वह भतीजे हैं, भाव से शिष्य हैं श्यामाशरण बाबा जी का महाराज जी से नाता केवल आध्यात्मिक ही नहीं बल्कि पारिवारिक भी है। महाराज जी के भाई के पुत्र यानी भतीजे हैं। कानपुर के उस गांव में उसी घर में जन्मे जहां महाराज जी का जन्म हुआ।
बचपन से ही महाराज जी की जो त्यागमय गाथाएं हैं वो सुनते-सुनते उनके भीतर भी भक्ति का भाव जो है प्रस्फुटित हो गया। वो ज्वाला प्रज्वलित हो गई और फाइनली उन्होंने दीक्षा ली अपने गुरु जी से और जो उनके काका श्री थे रिश्ते में जो अब महानसंत महापुरुष प्रेमानंद जी महाराज जी हैं उनके शिष्य के रूप में अपने जीवन को आगे बढ़ाया उन्हें अपने जीवन का मार्गदर्शक बना लिया।
#3. महामधुरी बाबा।

प्रोफेसर से साधु तक की उनकी यात्रा रही है। मूल रूप से पीलीभीत के वो रहने वाले हैं। वो पहले असिस्टेंट प्रोफेसर थे। पढ़ाई लिखाई और नौकरी से जो है उनका एक साधारण जीवन जो है भरा हुआ था। उस नॉर्मल लाइफ को जी रहे थे जैसे बाकी लोग जीते हैं।
प्रेमानंद जी महाराज के पांच पांडव शिष्यों के बारे में जानकारी।
लेकिन जब उनके भ्राता ने उनके भाई ने उन्हें वृंदावन लेजाकर के महाराज जी से मिलवाया, भेंट करवाई तो उनके जीवन की धारा ही बदल गई। गुरु कृपा का ऐसा प्रभाव रहा कि नौकरी का मोह त्याग करके उन्होंने साधु का वेश जो है धारण कर लिया और आज वो महाराज जी की सेवामें और पूर्ण समर्पण से वहां सेवा भाव कर रहे हैं, वहां रहते हैं।
#4. आनंद प्रसाद बाबा जी

आनंद प्रसाद बाबा जी की जिनका जो जीवन क्रम है वह रहा है व्यवसाय से विरक्ति की ओर दिल्ली के रहने वाले आनंद प्रसाद बाबा जी एक बड़े फुटवेयर व्यवसाय के मालिक थे।
परिवार, प्रतिष्ठा, समृद्धि सब कुछ था लेकिन 2018 में प्रेमानंद जीमहाराज जी का प्रवचन वो सुनते हैं और उनके भीतर जब वो वृंदावन आते हैं, भेंट करते हैं, उनके भीतर एक ऐसी आंतरिक शांति का संचार होता है कि वह अपने बिजनेस को त्याग देते हैं और अपने जीवन के हर क्षण को हरपल को गुरु सेवा में अर्पित कर देते हैं। भक्ति को समर्पित कर देते हैं।
#5. अलबेली शरण बाबा।

सीए से संत का सफर है चार्टर्ड अकाउंटेंट थे दिल्ली के प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे अलबेली शरण बाबा भी अपने पिताजी और परिवार के बाकी सदस्यों की तरह सीए बने।
सक्सेसफुल करियर था, पैसा था, सम्मान था, सब था लेकिन जब वह वृंदावन में प्रेमानंद जीमहाराज जी के प्रवचन को सुनते हैं, उनके सत्संग को सुनते हैं, उनके भीतर एक नई आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। वो सांसारिक मोह माया और करियर की चमक दमक को छोड़ देते हैं।
वृंदावन आकर के राधा रानीजी की सेवा में अपने जीवन को समर्पित कर देते हैं और साधु जीवन जो है व्यतीत करना शुरू कर देते हैं।
प्रेमानंद जी महाराज के पांच पांडव शिष्यों के बारे में जानकारी।
इन पांच संतों की कहानी यानी पांडवों की तरह इन्होंने भक्ति और गुरु निष्ठा जो है वो दिखाई है प्रेमानंदजी महाराज जी के जो ये शिष्य हैं जिनकी जीवन गाथा पांडवों की याद दिलाते हैं।
पांडवों के पास में भी तो अवसर था राज्य शक्ति सुख सुविधाओं का लेकिन जब धर्म की बात आई भगवान श्री कृष्ण का साथ देने की बात आई उन्होंने सब कुछ त्याग करके भक्ति का और सत्य का रास्ता चुना इसीलिए महाभारत में कहा गया कि पांडवों की सबसे बड़ी शक्ति थी कि उनका अटूट विश्वास उनकी अटूट श्रद्धा जो है भगवान पर समर्पित थी।
गुरु आज्ञा पालन वो हमेशा करते थे महाराज जी के जो शिष्य हैं यह भी उसी परंपरा के जीवंत प्रतीक हैं जिन्होंने सांसारिक मोह माया को त्याग दिया और वही राह अपनाई है जिस पर पांडव चले थे भक्ति की राह, सेवा की राह, धर्मकी राह।
निष्कर्ष :- यह कहानी हमें सिखाती है सबसे बड़ी सीख मिलती है कि सच्चा धन और सच्चा सुख वही है जो भक्ति और गुरु सेवा में मिलता है। जो त्याग कर सकता है इस जीवन में असली विजेता वही है।
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