खुशियों को बांटना शुरू कीजिए बड़ा सुकून मिलेगा।

दोस्तों छीन कर खाने वालों का पेट कभी नहीं भरा और बांट कर खाने वाले कभी भूखे नहीं रहे इसलिए बांट कर खाना सीखिए और खुशियों को बांटना शुरू कीजिए क्योंकि इससे बहुत बड़ा सुकून मिलता है।
यह कहानी है एक केले बेचने वाली बूढ़ी अम्मा की उनके परिवार में कोई और नहीं था वो अकेली अपना जीवन यापन करती थी मंडी से केले लेकर के आती थी सड़क किनारे बेचती थी वही जंहा वो अपनी ठेली लगाती एक लड़का ऑफिस से निकलने के बाद वहां से केले खरीद लेता था लेकिन उसकी आदत थी वो एक केला उठाता उसमें से छिलता उतारकर थोडा चखता कहता ये तो मीठा नहीं है वहीं पर रख देता फिर कहता दूसरा वाला चखना है दूसरा केला लेता उसमें से एक टुकड़ा निकालता चखता कहता हां यह मीठा है।
ऐसे करके वो केला लेकर के जाता था और जब भी वो केले खरीदता यही काम रिपीट करता था बार-बार ये प्रोसेस करता था वो माताजी भी ठीक है चखना चाहता है कोई बात नहीं एक दिन वो अपनी पत्नी के साथ वहां से निकल रहा था वो रुक गया केले वाली अम्मा को देखकर के उसने केले खरीदे और वही उसने काम किया जो करता था जो उसका कार्यक्रम रहता था एक केला लिया एक टुकड़ा निकालकर रख दिया फिर दूसरा केला लिया उसमे से एक टुकड़ा चखा कहा यह वाला ठीक है।
उसकी पत्नी ने भी चखा केला उसने कहा मीठा ठीक है। चले गए चार दिन बाद फिर वहां से निकले वही उसने वापस रिपीट किया। अबकी बार पत्नी से रहा नहीं गया। उसने कहा मीठे केले होते हैं। क्यों तुम ये बार-बार नाटक करते हो, चखते हो, रख देते हो। दो-दो केले वैसे ही खराब कर देते हो। उस व्यक्ति ने कहा अभी घर चलेंगे तो बताऊंगा।
खुशियों को बांटना शुरू कीजिए बड़ा सुकून मिलेगा।
वहां से जब निकले तो कहने लगा मुझे पता है केले बहुत मीठे होते हैं। बहुत अच्छे होते हैं लेकिन मैं पता है क्या करता हूं? वो माताजी ना बूढ़ी अम्मा वो अपने लिए तो केले खाती नहीं है। अपने लिए तो रखती नहीं है, क्योंकि उन्हें तो बेचने हैं। उनको पैसे कमाने हैं। इतना पैसा आएगा तभी तो घर चलेगा तो वो केले कैसे खाएंगी? इतने मीठे-मीठे।
बस मैं वो चखने के बहाने से एक चखता हूं। रख देता हूं कि ये ठीक नहीं है जबकि वो भी मीठा होता है। दूसरा चखता हूं। कहता हूं यह मीठा है। दो-दो केले उनके लिए रख आता हूं ताकि वो भी कुछ खा लें। वो जो पत्नी थी बड़ी मुस्कुराई। बोली कि मैं बड़ी भाग्यशाली हूं। लकी हूं कि आपके जैसा पति मुझे मिला। बहुत नेक दिल हो आप।
उधर वो जो बूढ़ी मां थी जो केले बेचती थी उनके पास में ही एक सब्जी वाली महिला थी जो सब्जी बेचती थी तो वो महिला कहने लगी कि माता जी आपको लूट करके चला जाता है। वो चखने चखने के बहाने आपके साथ में बातें कर रहा होता है और आप इधर तराजू में और केले चढ़ाती जाती हैं। पलड़ा भारी हो जाता है। बूढ़ी अम्मा ने कहा कि अरे मुझे पता है उसे लगता है कि मुझे पता नहीं है।
वो मुझे खिलाने के लिए सब करता है। उसका प्रेम है मेरे लिए और मेरा भी तो प्रेम है ना। मैं भी बस उसकी बातों में रहती हूं और और केले चढ़ा देती हूं। वो 1 दर्जन मांगता है थोड़े ज्यादा कर देती हूं वो अपनी ओर से प्रेम दिखाता है तो मैं प्रेम नहीं दिखाऊंगी भला।
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