जीवन में नियत साफ रखोगे तो सब कुछ अच्छा होगा।

दोस्तों यदि आप नियत साफ रखोगे तो सब कुछ अच्छा होने लगेगा और काम भी अपने आप ठीक होने लगेंगे क्योंकि हमारे विचार हमारे कर्म होते हैं, इसलिए विचारों का शुद्धिकरण बहुत आवश्यक है, विचारों को शुद्ध कीजिए कर्म अपने आप शुद्ध हो जाएंगे।
इस बात को एक कहानी के माध्यम से समझते हैं यह कहानी एक चोर की और एक महात्मा जी की है महात्मा जी से जब उस चोर की भेंट हुई तो महात्मा जी ने कहा कि बेटा क्या चोरी के काम करते हो भगवान का नाम लिया करो तो चोर ने कहा चलो भगवान का नाम तो ले लूंगा और क्या करना है तो महात्मा जी ने कहा बेटा प्रतिदिन मंदिर जाओ पूजा पाठ करो।
इसपर चोर ने कहा नहीं महाराज जी मैं यह सब नहीं कर पाऊंगा नाम ले लूंगा इतना मैं कर लूंगा और कुछ काम हो तो बताओ तो महात्मा जी ने कहा चलो ठीक है तुम तो सिर्फ एक काम करना तुम्हें कोई भी पराई स्त्री मिले तो उसे माता या बहन मानना।
चोर ने कहा ठीक है गुरु जी यह वाली बात जो है आपकी मुझे जम गई मैं करूंगा। कोई भी पराई स्त्री मिलेगी माता या बहन के रूप में ही देखूंगा। जिस राज्य में वो चोर रहता था उसका राजा जो था वो निसंतान था। उसे कोई संतान नहीं हुई थी और इस चक्कर में उसने अपनी रानी को भी अपने महल से अलग कर दिया था।
12 साल से रानी को उसने अलग कर रखा था। उस मकान की सुरक्षा के लिए उस मकान के बाहर जो है शादी वर्दी में उसने सैनिक तैनात कर रखे थे कि कौन आ रहा है कौन जा रहा है मुझे खबर देते रहो जासूस के रूप में वो काम कर रहे होते थे।
जीवन में नियत साफ रखोगे तो सब कुछ अच्छा होगा।
एक रात्रि को वो चोर जो था उसी मकान में चोरी करने के लिए पहुंचा उसे पता भी नहीं था कि इस माकन में रानी रहती है वो तो चला गया चोरी करने के लिए इधर सैनिकों ने देखा कि कोई आया है मकान में बिना देरी के दौड़े भागे राजा के पास राजा को बताया कि कोई आया है राजा भी दौड़ा भागा आया और खिड़की में से झांकने लगा सुनने लगा कि अंदर क्या हो रहा है।
वह जो चोर था चोरी कर रहा था तभी रानी ने उसे देख लिया और उसे कहने लगी कि तुम यहां चोरी करने आए हो। चोर ने कहा क्षमा करना अब तो आपने मुझे देख लिया लेकिन राजा को मत बताना। सैनिकों को मत बताना।
रानी ने कहा मैं नहीं बताऊंगी। अच्छा ये बताओ कि आए कैसे हो? उसने कहा जी मैं ऊंट पर आया हूं। रानी ने कहा अगर मैं तुम्हारे ऊंट को सोने चांदी से भर दूं। लाद दूं उसे। बहुत सारा सोना चांदी तुम्हें दे दूं। तुम बस मेरी इच्छा पूरी कर दो चोर दो कदम पीछे हट गया। बोला नहीं आप मेरी माता हैं। पुत्र के लायक कोई काम हो तो वह बताओ।
रानी बहुत प्रभावित हुई कहने लगी अच्छा यह राजा जो सब कुछ सुन रहा था दौड़ा भागा अंदर चला आया सैनिकों के साथ और उस चोर को पकड़ के ले गया। राजा भी बड़ा प्रभावित हुआ कि चोर और इतनी ईमानदारी।
जीवन में नियत साफ रखोगे तो सब कुछ अच्छा होगा।
राजमहल में ले जाया गया। उस चोर से कहा गया कि मैं तुम्हारी ईमानदारी से बहुत प्रभावित हुआ हूं। बोलो तुम क्या चाहते हो? क्या मांगना चाहते हो? चोर ने कहा कि मेरी वह मां जो 12 साल से आपसे अलग हैं। राजमहल में रहना चाहिए उन्हें रानी को लेकिन आपने उन्हें अलग कर रखा है उन्हें फिर से सुहागिन बना दो। दोबारा उन्हें लेकर के आ जाओ उसी सम्मान के साथ जिसकी वो हकदार है।
राजा बहुत ज्यादा प्रभावित हो गया। पहुंचा रानी के पास जहां वो रहती थी उस मकान में कहने लगा कि चलिए ससम्मान आपका स्वागत है फिर से राजमहल में। रानी ने पूछा अचानक हृदय परिवर्तन तो राजा ने बताया कि वो चोर कह रहा है कि मेरी मां को वापस लेकर के आ जाओ।
उसने माता के रूप में आपको देखा है। रानी ने कहा ठीक है मैं चल दूंगी आपके साथ लेकिन आपको मेरी एक इच्छा जो है माननी होगी। एक बात माननी होगी और ऐसे नहीं आप लिख के दो कि जो मैं कहूंगी वो होगा और नीचे मोहर लगा के दो अपनी।
राजा ने कहा ठीक है। अब बताओ करना क्या है? रानी ने कहा जो मेरा वो पुत्र है अभी-अभी जो पुत्र बना है, मैं चाहती हूं कि उसे हम स्वीकारें। अपना पुत्र माने और उसे राज्य का उत्तराधिकारी घोषित करें। अगला युवराज घोषित करें।
राजा प्रसन्नता के साथ बोला कि बिल्कुल यही होगा। राजा रानी ने उस दिन से उस चोर को अपना बेटा मान लिया और उसे राज्य का अगला युवराज घोषित कर दिया। महात्मा जी की एक बात ने चोर को युवराज बना दिया क्योंकि उसकी नीयत साफ़ थी इसलिए यदि आप नियत साफ रखोगे तो सब कुछ अच्छा होने लगेगा और काम भी अपने आप ठीक होने लगेंगे।
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