जीवन में किसी का अहित नहीं सोचना चाहिए।

दोस्तों इस दुनिया में असली दुख का कारण लगाव है, अटैचमेंट है। जिस दिन आप इस अटैचमेंट से दूर हो जाएंगे उस दिन चीजें आपके लिए आसान हो जाएंगी क्योंकि जीवन में ऐसी सोच रखिए कि जो खोया उसका गम नहीं इसलिए जो पाया वह किसी से कम नहीं, जो नहीं है वो एक ख्वाब है पर जो पास है, वो लाजवाब है।
एक बिजनेसमैन जो अपनी विदेश यात्रा से वापस लौटे और जिस दिन वो शहर में आए, जिस दिन उन्होंने एयरपोर्ट से टैक्सी की, वो अपने घर तक पहुंचे, तो वहां जैसे ही वो टैक्सी से बाहर निकले, उन्होंने देखा कि उनके मकान में आग लग चुकी है। पूरा मकान जो है जल रहा था। घरवाले एक-एक करके बाहर चले आए थे। सारे घरवाले घर के बाहर थे और उस जलते हुए मकान को देख रहे थे।
इन्होंने जैसे तैसे उस टैक्सी वाले को किराया दिया और वहीं पर खड़े-खड़े रोने लग गए। रोते चले गए कि मेरे इतने सालों की कमाई, सब कुछ जल गया। सब कुछ खाक हो रहा है। बहुत जोर-जोर से रो रहे थे। इनका बड़ा बेटा वहीं पर मौजूद था वो भी देख रहा था कि पिताजी को क्या हो गया। कॉलोनी के बाकी लोग देख रहे थे कि भाई साहब गहरे सदमे में चले गए।
उस बड़े बेटे को लगा कि पिताजी को कहीं दिल का दौरा ना आ जाए। पिताजी ज्यादा बीमार ना हो जाए वो दौड़ के आया और कहने लगा कि पिताजी एक बात आपसे कहनी है, पिताजी ने कहा ऐसे समय पर क्या बात करनी है? फटाफट से फायर ब्रिगेड को बुलाओ। बोले हां हमने कॉल कर दी। आती होगी। हम कोशिश कर रहे हैं आग को काबू में करने की।
जीवन में किसी का अहित नहीं सोचना चाहिए।
आप मेरी बात सुनो जब आप विदेश यात्रा पर थे तब हमने आपके पीछे से इस मकान का सौदा कर दिया था। अच्छे पैसे मिल रहे थे। वह सौदा सुनकर आप भी प्रसन्न हो जाएंगे। पिताजी ने कहा अच्छा मतलब यह मकान तुमने बेच दिया। बोले हां जैसे ही पिताजी ने ये सुना उनका रोना बंद हो गया। उन्हें समझ में आ गया कि अब तो खरीदार की चिंता है। अब अपना क्या लेना देना? मकान जल भी रहा है तो जले। अब तो खरीदार जाने, उसका पैसा जाने, उसका मकान जाने।
अब तो हमारा इस मकान से कोई वास्ता नहीं एकदम से उनका रोना बंद हो गया। कॉलोनी के बाकी लोग देखने लगे कि ऐसी क्या बात बोल दी बच्चे ने अपने पिता से कि पिताजी रो ही नहीं रहे उनका रोना बंद हो गया चुपचाप हो गए एकदम से और बाकी लोग जैसे दर्शक बन के देख रहे थे वो भाई साहब भी वैसे ही अपने मकान को जलता हुआ देख के दर्शक की भूमिका में आ गए कोई फर्क नहीं पड़ रहा था उनको।
तभी उनका छोटा बेटा दफ्तर से दौड़ा भागा चला आया और उसने देखा कि पिताजी आ चुके हैं आकर के उसने प्रणाम किया बोले पापा आप आ गए बोले हां हां मैं आ गया हूं छोटा भाई जो था बड़ा पैनिकिक में था कि देखो पापा क्या हो रहा है ये क्या होगा अब हमारा सब कुछ सारी सेविंग सब खत्म हो रहा है पिताजी ने कहा अरे क्यों परेशान हो रहा है? इधर आ मेरे साथ। साइड में लेकर के गए।
जीवन में किसी का अहित नहीं सोचना चाहिए।
उससे कहने लगे तुझे तो पता ही होगा। बोले हां हां पापा इसका हमने सौदा कर दिया। बोले तो बस बेटा फिर क्या दिक्कत है? खरीदार जाने उसका काम जाने। अपना क्या लेना देना। पिताजी बड़े रिलैक्स्ड मोड में थे। छोटे बेटे ने कहा पापा वो सब तो ठीक है। सौदा तो हो गया लेकिन उसने अभी हमें पैसे नहीं दिए हैं। अभी टेक्निकली मकान हमारे ही पास है। हम ही इसके मालिक हैं।
जैसे ही छोटे बेटे ने ये बात बोली पिताजी फिर से जोर-जोर से रोने लगे। बाकी सारे लोग देख रहे थे कि अब छोटे वाले ने क्या बोल दिया कि इनको इतना रोना आ रहा है। बहुत छोटी सी कहानी है। वही भाई साहब वही जलता हुआ मकान। दो परिस्थितियां और दोनों में उनका रिएक्शन अलग-अलग। जब उन्हें पता चला कि मकान बिक गया है तो नॉर्मल हो गया। जब पता चला कि पैसा नहीं मिला है तो फिर से रोने लग गए।
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