जीवन में कभी भी अपनों का साथ मत छोड़ना।

दोस्तों एक बहुत छोटा सा प्रसंग है लेकिन जीवन में बहुत बड़ी बात सिखाता है कि अपने साथ हैं तो सब कुछ अच्छा है, क्योंकि आपको दुनिया की सारी दौलत मिल जाए और कोई सेलिब्रेट करने के लिए ना हो तो उस दौलत का कोई मतलब नहीं है।
भगवान श्री राम ने तीर चलाया जाकर के तीर जो है रावण की नाभि में लगा और रावण धराशाई होकर के धरती पर गिर पड़ा। रावण अपनी अंतिम सांसे गिन रहा था। किसी भी पल उसकी मृत्यु होने वाली थी तभी भगवान श्रीराम अपने भ्राता लक्ष्मण को बुलाते हैं और कहते हैं जाओ जाकर के ज्ञान ग्रहण कर लो।
रावण मरने ही वाला है कुछ पल की बात है लक्ष्मण जी को अंदर से क्रोध आता है लेकिन नियंत्रित करते हैं। आदर भाव से कहते हैं कि भैया क्षमा करें लेकिन मैं समझ नहीं पाया यह कौन सी ज्ञान की बात है जो हमारा दुश्मन है। जिसने भाभी का अपहरण किया जिसकी वजह से हम यहां लंका तक चले आए। हमने इतनी बड़ी सेना इकट्ठी की सब की मदद ली।
रावण अब मरने जा रहा है, अहंकार का नाश होने जा रहा है। आप कह रहे हैं कि जाकर के ज्ञान ग्रहण कर लो यह कौन सी बात है? भगवान श्री राम ने कहा कि रावण ने पाप किए, रावण ने गलतियां की। उसकी सजा उसे मिल गई वो दंड भुगत रहा है। उसकी मृत्यु होने जा रही है। आप तो जाओ और जाकर के उससे जो है ज्ञान ग्रहण कर लो।
जीवन में कभी भी अपनों का साथ मत छोड़ना।
लक्ष्मण जी बेमन से मन नहीं था लेकिन भैया ने बोला है गए और रावण के सिर के पास जाकर के खड़े हो गए। रावण से कहा हे रावण मेरे भाई ने मुझे भेजा है। मेरे भैया कह रहे हैं कि तुम ज्ञान बताओगे। बताओ ज्ञान की बातें कौन सी तुम्हारे पास है?
रावण ने मुंह फेर लिया। लक्ष्मण जी और क्रोधित हो गए। वापस आए आ करके कहने लगे कि मैंने आपसे कहा था उस अहंकारी का नाश हो गया लेकिन अहंकार नहीं मिट रहा। अभी भी गुस्से में घमंड में है, सिर जो है उसने उधर फेर लिया। क्या ज्ञान देगा वो मुझे?
भगवान श्री राम ने कहा कि लक्ष्मण तुम भूल गए जब हम किसी से ज्ञान ग्रहण करने के लिए जाते हैं तो उसके चरणों की ओर जाकर खड़े होते हैं। सिर के पास जाकर के खड़े हो गए तो कौन तुम्हें ज्ञान की बात बताएगा? लक्ष्मण जी फिर से बेमन से गए जाकर के चरणों की ओर जाकर बैठे। अबकी बार क्रोध शांत हो चुका था। बोले हे लंकापति रावण आपकी मृत्यु होने वाली है।
अंतिम श्वास चल रही है। भैया का आदेश है मुझे ज्ञान की बातें बताओ। रावण ने मुस्कुराकर लक्ष्मण जी की ओर देखा और कहा लक्ष्मण बात सिर्फ इतनी है कि तुम्हारे भैया ने तुम्हें संस्कार सिखा दिया। बड़ा अच्छा लगा। गुरु से जब ज्ञान ग्रहण करने जाओ तो चरणों की ओर बैठना चाहिए। अब मैं तुम्हें वो ज्ञान की बात बताने जा रहा हूं जो जीवन में हमेशा याद रखना। तुम्हें पता है तुम्हारी जीत क्यों हुई? तुम्हारे भैया क्यों जीत गए? क्यों सब जगह श्री राम की जयकार हो रही है? क्योंकि तुम श्री राम के साथ खड़े रहे।
जीवन में कभी भी अपनों का साथ मत छोड़ना।
यहां तक कि श्री राम ने जब कहा रावण से ज्ञान ग्रहण करो। तुम नहीं आना चाहते थे लेकिन संस्कार लेकर आ गए। तुम्हें आदेश मानना ही था। तुम भ्राता के साथ हर पल हर क्षण में खड़े थे। और तुम्हें पता है मेरी जान क्यों जा रही है। मेरी मृत्यु क्यों हो रही है? मेरी मृत्यु इसलिए हो रही है क्योंकि मेरा अपना उधर चला गया और जाकर के बता दिया कि तीर कहीं और नहीं सिर्फ नाभि में लगेगा क्योंकि अमृत वहीं है, इसीलिए मैं अपनों की ही वजह आज मरने जा रहा हूं। मेरे अपनों ने ही मेरा साथ छोड़ दिया और मेरी मृत्यु हो रही है।
जीवन में लक्ष्मण याद रखना कभी अपनों का साथ मत छोड़ना। बस जीवन का यही सबसे बड़ा ज्ञान है। बाकी बातें तो तुम्हें पता ही है। यह कहकर रावण ने जो है अंतिम सांस ले ली।
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