जीवन में हमेशा हिम्मत और हौंसला बनाये रखना जरुरी।

दोस्तों हम में से बहुत सारे लोग जब अकेले होते हैं, संकट में होते हैं, परेशानी में होते हैं तो घबरा जाते हैं क्योंकि हमें लगता है कोई अब साथ ही नहीं है लेकिन वो भूल जाते हैं कि जिस भगवान ने हमे जन्म दिया है वो हमे कैसे अकेले दुःख की घडी में छोड़ देगा वो कहता है कि तू खुश रहे, प्रसन्न रहे, मैं सब संभाल लूंगा बस हिम्मत और हौंसला बनाये रख।
प्रभु कहते हैं कि तू सोने से पहले सबको माफ करदे गा और मैं उठने से पहले तुझे माफ कर दूंगा।
एक छोटी सी कहानी के माध्यम से आपको समझाने की कोशिश करता हूं एक बच्चा जो अपनी मम्मी के साथ हर गर्मी की छुट्टी में नानी के घर जाता था जैसे बाकी बच्चे जाते हैं वैसे उसका रूटीन था लेकिन जिस साल वो 10 साल का हुआ उसी साल उसके घर में आफत आ गई। उसके पापा जो किराने की शॉप चलाते थे उसमें घाटा हो गया।
उसकी मम्मी ने उसे समझाया कि बेटा मैं तुम्हारे साथ नहीं चल सकती नानी के यहां पर क्योंकि मुझे यहां रहना है तुम्हारे पापा की मदद करनी है वो छोटा बच्चा नाराज हो गया। भोजन नहीं कर रहा, खाना नहीं खा रहा। चिढ़ गया कि यह कोई तरीका है वो अब छोटे बच्चे को कितना समझाएं?
उसके पापा ने समझाया कि बेटा मुझे मम्मा की जरूरत है हम दोनों मिलकर के फिर से दुकान को जो है ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं उस घाटे से निकलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उसे उतना समझ में नहीं आया था उसे सिर्फ नानी के घर जाना है। उसकी मम्मा ने सुबह-सुबह उसे कहा चलो ठीक है तुम्हें जाना है तुम अकेले चले जाओ।
जीवन में हमेशा हिम्मत और हौंसला बनाये रखना जरुरी।
अब मम्मी को लगा शायद बच्चा मना कर देगा अकेले क्यों जाएगा लेकिन बच्चा एक्साइटेड था तैयार हो गया बोला ठीक है मम्मा मैं अकेले चले जाऊंगा और आप मेरी टिकट करवा दो जो पत्नी थी उन्होंने अपने पति से बात की कि बच्चा तो मान गया जाने के लिए तो उन्होंने टिकट करा दी कि ठीक है जो होगा देखेंगे वहां उसका मामा आकर के रिसीव कर लेगा वो तो उस बच्चे को जो है जो डिसाइडेड डेट थी जिस दिन की टिकट थी उस दिन उसकी मम्मी स्टेशन लेकर के चली गई।
ट्रेन में जाकर के बच्चा अपनी बर्थ पर बैठ गया उसकी मम्मी ने उसे सब समझा दिया कि बेटा अजनबियों से जो है कुछ खाने पीने का सामान नहीं लेना है और उसे किन-किन बातों का ख्याल रखना होता है एक ट्रेन की यात्रा में वो उसे सब समझा रहे थे क्योंकि ज्यादा लंबी यात्रा नहीं थी। एक घंटे का सफर था लेकिन उस बच्चे के लिए मम्मी को चिंता थी पता नहीं पहुंच पाएगा कि नहीं कुछ हो ना जाए वगेरा-वगेरा।
वो बच्चा सुपर एक्साइटेड था बोला कि मम्मा आप टेंशन मत लो मैं पहुंच जाऊंगा वहां मामा तो आ ही जाएंगे फिर भी मम्मी ने एक लिफाफा अपने बैग में से निकाल के उसे दे दिया कि बेटा ये जो लिफाफा है ना ये अपने पास रख लो इस लिफापे में एक चिट्ठी मैंने आपके लिए लिखी है। अगर आपको बहुत ज्यादा टेंशन होने लगे, आप बहुत परेशान हो जाओ तो वो चिट्ठी खोल के पढ़ लेना।
जीवन में हमेशा हिम्मत और हौंसला बनाये रखना जरुरी।
उसने कहा ठीक है मम्मा जरूरत ही नहीं पड़ेगी आप टेंशन क्यों ले रहे हो? ट्रेन का हॉर्न बजा और ट्रेन निकल गई शुरू के 10 मिनट लड़का बहुत एक्साइटेड था सब अच्छा चल रहा था और उसे बड़ा मजा आ रहा था लेकिन उसके बाद उसका कॉन्फिडेंस डाउन होता गया।
उसने देखा आस-पास अजनबी चेहरे थे कभी उसने बिना मम्मा पापा के ट्रेवल नहीं किया था तो उसे बड़ा अजीब लग रहा था उसे डर लगने लगा अंदर ही अंदर घबराहट होने लगी और फिर उसे वो मम्मी की बात याद आई कि वो लिफापा जिसमे एक लेटर लिखा था उसने वो निकाला।
उसमें जो चिट्ठी उसकी मम्मा ने उसके लिए लिखा था पढने लगा जिसमे लिखा था कि प्यारे बेटे घबराओ मत, मैं पीछे वाले कंपार्टमेंट में ही बैठी हुई हूं तुम्हारे साथ इसी ट्रेन में साथ में ट्रैवल कर रही हूं। तुम आराम से बैठो रिलैक्स्ड रहो बस हमारी जर्नी खत्म होने वाली है।
आधे घंटे तक फिर से उसके अंदर कॉन्फिडेंस आ गया। सब कुछ बढ़िया रहा स्टेशन पर वो उतरा। उसके मामा उसे लेने के लिए आए थे। मामा से कहने लगा मामा देखो मम्मा पीछे वाले कोच में बैठी है इस पर मामा हंसने लगे और बोले बेटा वो तो वहीं है पापा के पास। बोले नहीं मम्मा वो देखो ना मम्मा ने एक चिट्ठी लिख के दी है जिसे देखकर उसके मामा समझ गए कि मम्मा ने कॉन्फिडेंस बूस्ट करने के लिए लिखा है और उसे समझाया बेटा नहीं मम्मा वहीं है।
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