जीवन में बदलाव के लिए समय का सम्मान करना जरुरी।

दोस्तों जिंदगी में आप चाहे जितने मेडल जीत लो, जितने सर्टिफिकेट जीत लो अंत में एक प्रमाण पत्र मिल जाता है, वो है मृत्यु प्रमाण पत्र और यह सबको मिलेगा इसलिए इससे पहले कि मृत्यु प्रमाण पत्र मिल जाए अपने जीवन को सुधारना शुरू कीजिये और अपने अंदर बदलाव लाना शुरू कीजिए क्योंकि अगर खेत सड़क पर होता है तो उसकी बहुत कीमत होती है, अगर दुकान सड़क पर होती है तो उसकी बहुत कीमत होती है यहां तक कि मकान सड़क पर होता है तो उसकी बहुत कीमत होती है, लेकिन कभी कोई इंसान सड़क पर होता है तो उसकी कोई कीमत नहीं होती।
एक छोटी सी कहानी के माध्यम से आपको समझाता हूं कि एक पुलिस कमिश्नर साहब की जो रिटायर्ड हो गए थे जो उनको सरकारी बंगला मिला था वह छोड़कर के उन्हें उस मकान में आना पड़ा जो उन्होंने कई बरसों पहले एक सोसाइटी में खरीदा था।
उस शहर की बड़ी सोसाइटी थी नामी सोसाइटी थी वहां उन्होंने घर खरीदा हुआ था उसमें आकर के शिफ्ट हो गए और अब रिटायरमेंट के बाद की उनकी लाइफ थोड़ी बदल गई थी क्योकि वे सुबह-सुबह वॉक पर चले जाते थे शाम में फिर वॉक पर चल जाते थे।
सुबह या शाम जब वे घर से निकलते थे, तो आजू-बाजू किसी से बात नहीं करते थे किसी से हाय हेलो नहीं हमेशा उस घमंड में रहते थे कि मैं पुलिस कमिश्नर हूं जिसके कारण कोई भी उनसे भी फिर हाय हेलो नहीं करता। लोगों ने कोशिश की एक दो बार लेकिन समझ गए कि यह तो अपने ही घमंड में रहते हैं तो कोई उनसे बात भी नहीं करता।
जीवन में बदलाव के लिए समय का सम्मान करना जरुरी।
एक दिन क्या हुआ कि वह शाम की वॉक के लिए जब निकले थे तो उनके पैरों में दर्द होने लगा तो पार्क में वह बेंच पर बैठ गए वहीं पर पास में एक बुजुर्ग बैठे हुए थे उनको यह अपने बारे में बताने लगे कि मैं पुलिस कमिश्नर था और मुझसे मिलने के लिए लोग आते थे और लाइन लगी रहती थी।
वो पास वाले सज्जन भी अपने बारे में बताना चाह रहे थे कि भाई मेरी भी सुन लो मैं कौन था लेकिन इन्होंने सुनी नहीं इनका दिमाग जो था सारा खोया हुआ था अपनी कहानियों में, अपनी बातों में, अपने किस्से सुनाने में।
अब उनका रोज का यह रूटीन हो गया वो शाम में आते अपने किस्से सुनाते, अपनी बातें बताते कभी पूछने की कोशिश नहीं की कि पास वाले भाई साहब जो हैं वो कौन हैं? क्या हैं? उनके बारे में कोई बात नहीं बस अपनी-अपनी सुनाना और चले जाना।
एक दिन वो जो बुजुर्ग थे उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने बोल दिया कि भाई साहब आपसे एक बात पूछता हूं कि बल्ब अगर बुझ जाता है तो उसकी क्या कीमत रहती है? तो ये जो पुलिस कमिश्नर साहब बोले कि उसकी कोई कीमत नहीं रहती तो बुजुर्ग आदमी बोले बस आप और हम अब बुझे हुए बल्ब की तरह हो गए अब वो बल्ब 5 वाट का हो, 10 का हो, 20 का हो, 100 का हो, बुझने के बाद उसकी कोई कीमत नहीं है।
जीवन में बदलाव के लिए समय का सम्मान करना जरुरी।
इस पर रिटायर्ड पुलिस कमिश्न रसाहब एकदम से गुस्से में आके बोले क्या बोल रहे हो आप? पता है आपको कि मैं पहले एक पुलिस कमिश्नर था तो वो सज्जन बोले कि भाई साहब मैं भी इसी राज्य का एक जिले का दो बार सांसद रह चुका हूं इस बात पर कमिश्नर साहब जो हैं एकदम से चौंक गए और बोले अच्छा उनके चेहरे पर जो है भाव बदल गए।
सज्जन व्यक्ति आगे बताने लगे कि सामने वाले व्यक्ति रेलवे में जनरल मैनेजर थे और वो दौड़ते हुए आ रहे हैं वो बहुत बड़े वैज्ञानिक थे हम सब किसी न किसी बड़े पद पर थे लेकिन अब रिटायर्ड हो चुके हैं इसलिए आप और हम अब बुझे हुए बल्ब की तरह हो गए अब हम जलते हुए बल्ब नहीं है।
भाई साहब आप अपनी-अपनी बताते रहते हो कभी आपने जानने की कोशिश नहीं की कि आपके आसपास कौन रह रहा है। आप हमेशा अपना ही अपना बताते रहते हो। आप बता रहे थे ना कि आपसे मिलने के लिए लोग आते थे अब कोई आता है क्या?
पुलिस कमिश्नर साहब बोले नहीं अब तो कोई नहीं आता। उन सज्जन ने कहा बस यही जिंदगी है, समय का ही सम्मान हो रहा होता है।
निष्कर्ष :- इस दुनिया में हमेशा याद रखना जो कीमत है, जो सम्मान है, वह उगते हुए सूरज का ही है डूबते सूरज को कोई प्रणाम नहीं करता क्योंकि वह अंधकार का प्रतीक है।
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