जीवन को व्यर्थ गवाँना बंद करें और जिंदगी का आनंद लीजिये।

हमारी पूरी जिंदगी निकल जाती है दूसरों की जिंदगी में झांकने में, ताका झांकी करने में कि उसके जीवन में क्या चल रहा है? उसकी लाइफ में क्या चल रहा है? वो ऐसा क्यों है? वैसा क्यों? उसने ऐसा क्यों किया? वैसा क्यों किया? पूरी लाइफ हम दूसरों को एनालाइज करते रहते हैं।
सेल्फ एनालिसिस भूल जाते हैं। खुद को एनालाइज करना भूल जाते हैं इसलिए इस जीवन को व्यर्थ गवाँना बंद कीजिए और जिंदगी का आनंद लेना शुरू कीजिए, इसकी कीमत को समझना शुरू कीजिए।
एक बिजनेस मैन की जो हीरो का व्यापारी था एक शहर से दूसरे शहर जा रहा था। समुद्री रास्ते से जहाज में जो है बैठकर के उसे ट्रैवल करना था। 7 दिन की यात्रा थी और वह व्यापारी अपने साथ में हीरो की एक छोटी सी पोटली एक गठरी लेकर के जा रहा था उसी के व्यापार के सिलसिले में उसे दूसरे शहर में जाना था।
यह बात एक ठग को पता चल गई और वह ठग उस बिजनेस मैन के पीछे-पीछे हो लिया। उसने अपना भेष बदल लिया। बिजनेस मैन की तरह जो है कपड़े पहन लिए। ड्रेस अप कर लिया और उस जहाज में वो भी सवार हो गया साथ में उसके चिपक के चलने लगा।
कोशिश करने लगा बातचीत करने की, फ्रेंडशिप करने की। और फाइनली उन दोनों के बीच में बातचीत बढ़ी। ये जो ठग था इसने अपने को बहुत बड़ा बिज़नेसमैन बताया। बहुत ऊंची-ऊंची फेंकी। वहां मेरी फैक्ट्री, यहां मेरी फैक्ट्री, यहां बिज़नेस है, वहां बिज़नेस है। उस कंट्री में, इस कंट्री में बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था।
जीवन को व्यर्थ गवाँना बंद करें और जिंदगी का आनंद लीजिये।
एक-दो दिन के अंदर दोनों के जो है अच्छी बॉन्डिंग हुई। दोनों की अच्छी मित्रता हो गई। दोनों साथ में रुके। उसी जहाज में जो एक कमरा था उसमें। जब-जब वो जो असली बिजनेस मैन था वो बाहर जाता था किसी काम से या वॉश रूम के लिए तब-तब यह जो नकली वाला बिजनेसमैन था, जो ठग था, वो उस असली बिजनेस मैन के बैग को तलाशने की कोशिश करता था।
उसके अंदर ढूंढने की कोशिश करता था कि वो हीरों की पोटली मिल जाए। वो गठरी मिल जाए। छोटा सा जो बैग है लेकिन मिलता ही नहीं। तीन दिन, 4 दिन, पांच दिन आखिरी दिन आ गया यात्रा का इसके चेहरे पर बहुत चिंता थी। बहुत परेशान हो रहा था कि टिकट का खर्चा हो गया। फालतू में सात दिन मेरे व्यर्थ हो गए।
वो जो असली बिजनेसमैन था उसने देख लिया कि जो मेरा नया-नया दोस्त बना है इसके चेहरे पर तो हवाइयां जो है उड़ी हुई है तो उसने पूछा भाई बात क्या है? इतने परेशान क्यों? इतनी चिंता में क्यों? तो वो जो ठग था उसने कहा, नहीं-नहीं कोई बात नहीं है।
मैं तो बिज़नेस को लेकर के चिंता में हूं तो जसली बिज़नेस मैन था उसने अपनी ओर से कुछ बिजनेस मैनेजमेंट के टिप्स दिए ऐसा करो वैसा करो। वो जो ठग था उसका दिमाग खराब हो रहा था कि फालतू की बातें कर रहा पता नहीं चल पा रहा है कि वो हीरों की पोटली कहाँ है।
जीवन को व्यर्थ गवाँना बंद करें और जिंदगी का आनंद लीजिये।
फाइनली वो यात्रा समाप्त हो गई। फाइनली पहुंच गए जहां पहुंचना था। और जब सब अपने-अपने घर की ओर निकल रहे थे। तभी पीछे से दौड़ता हुआ आया ठग और आकर के उस असली बिज़नेसमैन से कह कि भाई साहब सुनो एक बात पूछ रहा हूं सच्ची सच्ची बताना। आप सच में बिजनेस मैन हो या ठग हो?
उसने कहा क्या बोल रहे हो? मैं बिजनेस मैन हूं। बोला नहीं आप मुझसे भी बड़े ठग हो। मैं आपको सच बताता हूं। मैं कोई बिजनेसमैन नहीं हूं। मैं तो ठग हूं। मुझे पता था कि आप अपने साथ एक हीरो की पोटली लेकर के निकले हो। उसी के बिजनेस के लिए यहां आए हो और मैं वो चुराना चाहता था इसलिए मैंने बिजनेस मैन का ड्रेस अप किया। नौटंकी करी और आपके पीछे आ गया लेकिन आप मुझसे भी बड़े ठग निकले।
आपने वो छुपा कर कहां रखी है? मुझे अब तक क्यों नहीं मिली? मैं सात दिन आपके साथ रहा लेकिन ढूंढ नहीं पाया। अब तो बता दो। वो जो बिजनेसमैन था हंसने लगा। बोला भाई मैं कोई ठग-बग नहीं हूं। बस मैंने तो एक सिंपल सा फार्मूला अपनाया। जब-जब मैं उस कमरे को छोड़कर के बाहर निकलता था मैं वो जो पोटली थी वो मेरे बैग से निकाल कर तुम्हारे बैग में डाल देता था ताकि तुम मेरे बैग को टटोलते रहो और तुम्हें कुछ मिले ही नहीं। वापस आता था फिर से तुम्हारे बैग में से निकाल करके अपने बैग में रख लेता था।
मैंने सातों दिन यही फार्मूला अपनाया। जब-जब गायब होता था अपनी उस पोटली को तुम्हारे बैग में डाल जाता था। तुमने मेरे बैग को पूरा टटोल लिया। पूरी ताका झांकी कर ली लेकिन अपने बैग को नहीं टटोला।
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