इस दुनियाँ में जितने भी प्राणी है वो सब अनमोल हैं।

दोस्तों जमाना तो उस मोड़ पर आ पहुंचा है कि जिस इंसान की मदद करने की सोचो, वही पीछे से वार कर देता है, इसलिए सबकी इज्जत करनी चाहिए क्योंकि हर किसी की अपनी इज्जत होती है।
एक बच्चे की इमोशनल सी कहानी जो शाम के समय ट्यूशन पढ़ने के लिए अपनी कॉलोनी में में जाता था। शाम के समय जब वो निकला तो उसने देखा कि एक नई दुकान खुली है कॉलोनी में वो दुकान जो थी वो छोटे कुत्तों की थी। वहां पर बोर्ड लगा था पप्पीज फॉर सेल। वो बच्चा बड़ा एक्साइटेड हुआ कि अरे वाह क्या बात है। पप्पीज की शॉप लग गई हमारी जो है कॉलोनी में।
धीरे-धीरे वो सीढ़ियां चढ़ के जो है दुकान के अंदर चला गया। जाकर के देखता है कि बहुत सारे छोटे-छोटे पप्पीज हैं। अलग-अलग ब्रीड के पप्पीज हैं। दुकानदार से उसने बात की कि हेलो अंकल क्या प्राइस है? तो दुकानदार ने बताया कि बेटा ₹2000 से शुरू है और 10,000, 15,000, 20,000 के पप्पीज हैं। अलग-अलग ब्रीड के हिसाब से अलग-अलग रेट है। बच्चा बड़ा एक्साइटेड हुआ। उसके पास में ₹100 का नोट था। उसने वो ₹100 का नोट दिया और कहा अंकल क्या मैं इन पप्पीज के साथ में थोड़ी देर खेल सकता हूं?
इस दुनियाँ में जितने भी प्राणी है वो सब अनमोल हैं।
उस शॉप कीपर ने कहा अरे बेटा ₹100 की जरूरत नहीं है। तुम रखो अपने पास पैसे तुम्हारे काम आएंगे। तुम ऐसे ही खेल लो। खेलना ही तो है। बच्चा बड़ा खुश हुआ जाकर के उन पप्पीज के साथ में खेलने लगा।तब उसने देखा कि एक पप्पी जो था वो कोने में था वो बाकी पप्पीज के साथ में घुल मिल नहीं रहा था, खेल नहीं रहा था तो उसने पूछा शॉपकीपर अंकल से कि अंकल इसको क्या हुआ? यह क्यों नहीं खेल रहा है? तो वो जो शॉपकीपर था उसने कहा कि अरे बेटा इसकी ना एक टांग जो है वो ढंग से काम नहीं करती। लंगड़ा के चलता है, इसलिए ज्यादा जो है घुलता मिलता नहीं है।
एक तरफ ही रहता है। कोने में ही रहता है। उस बच्चे ने कहा अंकल इसका प्राइस क्या है? शॉप कीपर ने कहा इसका क्या प्राइस होगा? इसका कोई प्राइस नहीं है। उस बच्चे ने कहा अंकल मुझे यही वाला पप्पी चाहिए। दुकानदार ने कहा बेटा इसका क्या करोगे? खेल भी नहीं पाएगा। तुम इसके साथ खेल नहीं पाओगे। करोगे क्या इसका?
उसने कहा, नहीं अंकल मुझे यही वाला चाहिए। और इसका प्राइस बताओ क्या प्राइस है? दुकानदार ने कहा बेटा मैंने कुछ सोचा ही नहीं। इसका क्या प्राइस लूं? मैं किसी से कोई इसको लेकर के भी नहीं जाएगा। पता है तुम्हें? उस बच्चे ने कहा अंकल थोड़ी देर वेट करो मैं आता हूं। वो बच्चा फिर से धीरे-धीरे सीढ़ी उतरा गया अपने घर पर और वहां से जो है कुछ पैसे लेकर के उसने जाकर के अपनी जो गुल्लक थी उसको तोड़ दी।
इस दुनियाँ में जितने भी प्राणी है वो सब अनमोल हैं।
जितने रुपए थे इकट्ठे कर लाया और लाकर के दुकानदार के काउंटर पर रख दिया और बोला कि अंकल काउंट कर लो 2000 में थोड़े बहुत भी कम पड़ रहे हो ना मैं आपको देके जाऊंगा। ₹2000 में ही इस पप्पी को लेके जाऊंगा। मुझे पप्पी चाहिए।
दुकानदार ने फिर से समझाया बेटा इसके साथ कैसे खेलोगे? यह चलता नहीं है। लंगड़ा के चलता है। परेशान रहता है। तुम क्या करोगे इसका? किसी काम का नहीं है यह। वो बच्चा रोआ सा हो गया। उसने अपनी पेंट जो है थोड़ी सी ऊपर की और दिखाया कि उसका जो लेफ्ट वाला पांव था उसमें स्टील की रड डली हुई थी। बसेस के सहारे चलता था वो बच्चा। उसने कहा अंकल इस तरीके से तो मैं भी किसी काम का नहीं हूं।
मेरे घर वालों ने तो मुझे आज तक नहीं निकाला। अपने साथ रखते हैं, अपना मानते हैं। सब कुछ जो है मेरे लिए करते हैं। और आप कह रहे हो यह किसी काम का नहीं है। आप इसका प्राइस भी नहीं बता रहे हो। आपके लिए यह बिल्कुल वेस्ट है। इसको मैंही लेकर जाऊंगा। आप पैसे काउंट करो। बताओ कितने कम है। मैं वापस आऊंगा। सारे पैसे दूंगा और फिर यह पप्पी ले जाऊंगा।
दुकानदार की आंखें इमोशनल हो गई। उसने कहा बेटा तुम ले जाओ। मुझे रुपए नहीं चाहिए। उस बच्चे ने कहा नहीं रुपए तो मैं दूंगा। जब सबका प्राइस है तो उसका भी होना चाहिए। और अंकल याद रखो इस दुनिया में जो भी आए ना सब अनमोल होते हैं। प्राइसलेस होते हैं। हम सब उनकी संतान हैं। जब उन्होंने भेदभाव नहीं किया तो हम कौन होते हैं करने वाले?
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