हमेशा नारी का सम्मान करना चाहिए।

हमेशा नारी का सम्मान करना चाहिए क्योंकि धर्म का सबसे बड़ा नियम यह कहता है कि जो स्त्री का अपमान करता है उसका पतन होना निश्चित है यह बात हमें रामायण में रावण की कहानी से समझना चाहिए।
रावण ने भगवान विष्णु की भक्त तपस्वनी वेदवती का शील भंग करने का प्रयास किया था जिसके चलते उन्होंने अपनी देह त्याग दी थी और रावण को श्राप दिया था कि तुम्हारी मृत्यु एक स्त्री के कारण ही होगी।
इसके अलावा रावण जो था उसने रंभा पर भी जो अप्सरा थी रंभा उस पर भी बुरी नजर डाली थी। वाल्मीकि रामायण की बात करें तो विश्व विजय करने के लिए जब रावण स्वर्ग लोक में पहुंचता है तो उसे वहां रंभा नाम की अप्सरा दिखाई देती है और वह रंभा पर भी जो है बुरी नजर डालता है।
रंभा जो है उसे समझाती है उसे कहती है कि आप मुझे जो है छोड़ दीजिए। मैं आपके बड़े भाई कुबेर जो हैं उनके बेटे नल कुबेर की पत्नी हूं और आप अपनी पुत्र वधू का ऐसे अपमान मत कीजिए लेकिन रावण मानता नहीं है। रावण जो है वहां पर अपनी अति जो है उसे पार कर देता है।
अपनी सीमाएं लांग देता है और यह बात जब नल कुबेर को पता चलती है तो रावण को श्राप देता है कि आज के बाद अगर तुमने किसी भी स्त्री को उसकी इच्छा के बिना स्पर्श किया तो तुम्हारे मस्तिष्क के 100 टुकड़े हो जाएंगे। 100 टुकड़ों में तुम्हारा सिर जो है वह विभाजित हो जाएगा इसलिए भी कहते हैं कि रावण जो था वो सीताजी के पास भी नहीं आया।
अपनी जिंदगी सुधारने में समय लगाइए।
यह रावण की मर्यादा की बातें तो सुनने को मिलती है लेकिन यह उसके पीछे की कहानी भी निकल के आती है कि रावण को पता था कि अगर उसने स्पर्श भी किया तो रावण जो है वो उसका मस्तिष्क जो है वो 100 टुकड़ों में विभाजित हो जाएगा।
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