भगवान को जिस तक जो पहुंचाना होता है उसे पहुंचा देता है।

भगवान को जो कराना है जिससे कराना है वो करा लेते हैं। ना हम श्रेष्ठ हैं ना हम खास हैं। हम तो उनके दास हैं। जब आपने विचार अपने माइंड में डाल लिया, जब यह सोचना शुरू कर दिया,जीवन की हर समस्या का समाधान मिल जाएगा। जीवन की हर प्रॉब्लम को सहने की शक्ति मिल जाएगी। हर संकट से बाहर निकलने का सामर्थ्य मिल जाएगा। लेकिन उसके लिए यह विचार मन में डालना बहुत आवश्यक है।
एक बड़ी छोटी सी कहानी एक राजा की जिसके राज्य में एक मंदिर था। बड़ा प्रसिद्ध मंदिर। दूर-दूर से लोग दर्शन करने के लिए आते थे और राजा स्वयं भी प्रतिदिन वहां जो है दर्शन के लिए जाता था जब राजा दर्शन करने के बाद पूजा पाठ करने के बाद मंदिर से वापस रवाना होता तो सीढ़ियों से उतरता अपने राजमहल की तरफ जाने के लिए तो देखता कि सीढ़ियों पर लेफ्ट साइड और राइट साइड दोनों साइड जो है भिखारी बैठे होते थे।
जो लेफ्ट साइड वाला भिखारी था वो कहता था कि हे भगवान तूने राजा को बहुत कुछ दिया है थोड़ा मुझे भी दे दे और राइट साइड वाला कहता था हे राजा तुम्हें भगवान ने बहुत कुछ दिया है थोड़ा मुझे भी दे दो। यह डायलॉग उसे रोज सुनने को मिलते थे। काफी दिनों तक वो इनको नजर अंदाज करता रहा, इग्नोर करता रहा लेकिन एक दिन राजमहल में बैठा था तो उसके मन में ख्याल आया कि दोनों दो बातें करते हैं अलग-अलग तरीके की बातें।
भगवान को जिस तक जो पहुंचाना होता है उसे पहुंचा देता है।
पहले वाला कहता है कि भगवान तुमने राजा को बहुत कुछ दिया है। थोड़ा मुझे दे दो। भगवान से मांगता है। दूसरा वाला कहता है हे राजा तुझे भगवान ने बहुत कुछ दिया है। थोड़ा मुझे भी दे दे। दूसरे वाला मुझसे मांगता है तो उसने मंत्री को बुलाया और कहा देखो आप भी मेरे साथ चलते हो। आपको पता है दो भिखारी दोनों अलग-अलग बातें करते हैं।
राइट साइड वाला मुझसे मांगता है। उसका भरोसा भगवान से ज्यादा मुझ पर है तो क्यों ना हम उसकी मदद करें वो रोज कह रहा है कि हे राजा तुम्हें भगवान ने बहुत कुछ दिया है। थोड़ा मुझे दे दो। कल मैं किसी कार्य से राज्य से बाहर जाऊंगा। आप मेरी ओर से उसकी मदद करना। एक कटोरे में स्वादिष्ट खीर बनवा के ले जाना और उस कटोरे में नीचे की ओर सोने के सिक्के जो है छुपा देना। उसे खीर भी मिल जाएगी, सिक्के भी मिल जाएंगे।
उसका जीवन पलट जाएगा। फिर कभी वहां भीख मांगने के लिए नहीं आएगा। मंत्री बड़ा खुश हुआ कि बड़ा अच्छा आपने जो है आईडिया सोचा है। बड़ा अच्छा जो है आपका विचार है। अगले दिन राजा जो था वो राज्य से बाहर गया हुआ था। मंत्री राजा के बिहाफ पर वहां पहुंचा और राइट साइड वाला जो भिखारी था राइट साइड वाले भिखारी को ले जाकर के वो कटोरा दे दिया खीर से भरा हुआ और उससे बोला लो तुम कहते थे ना राजा तुम्हें भगवान ने बहुत कुछ दिया है। तुम मुझे भी दे दो।
भगवान को जिस तक जो पहुंचाना होता है उसे पहुंचा देता है।
राजा साहब ने खुश होकर के खीर तुम्हारे लिए भिजवाई है। बड़ा खुश हुआ राइट साइड वाला भिखारी। उसने कहा वाह क्या बात है स्वादिष्ट खीर आई है। लेफ्ट वाले को चिढ़ा के खाने लगा। और जब थोड़ी बच गई तो बोला ले भाई तू भी खा ले तू भी क्या याद रखेगा। तुझे क्या पता क्या स्वाद होता है राजा के राजमहल की खीर का। ले चख ले थोड़ी खीर। उसने जो है वो कटोरा पास कर दिया लेफ्ट साइड वाले की ओर।
लेफ्ट साइड वाले ने कटोरा ले लिया। बोले मैं बाद में खाऊंगा। चला गया वहां से। जब वो गया तो जहां वो रहता था वहां जाकर के उसने थोड़ी सी खीर पी। उसके बाद देखा नीचे सोने के सिक्के चमक रहे थे। उस दिन के बाद लेफ्ट वाला जो है मंदिर की सीढ़ी पर भीख मांगने नहीं आया बल्कि धन्यवाद करने प्रतिदिन आया कि भगवान आपने मुझ तक जो पहुंचाना था वह पहुंचा दिया।
जब राजा लौट के आया अपने राज्य में मंदिर दर्शन के लिए गया। उसे पता चला कि क्या हो गया? तो राजा ने राइट साइड वाले को बोला कि भैया लेफ्ट साइड वाला सही कहता था कि हे भगवान तूने राजा को बहुत कुछ दिया। थोड़ा मुझे दे दे। दिया तो मैंने तुम्हें था। तुम्हारे हिस्से के सिक्के भेजे थे लेकिन वो तुम्हारे थे ही नहीं। भगवान को जिस तक जो पहुंचाना था। उन्होंने पहुंचा दिया।
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