बाबा नीम करोली जी का जीवन परिचय।

हैल्लो दोस्तों नमस्कार पिछले आर्टिकल में मैंने देश के सबसे बड़े संत श्री प्रेमानंद जी महाराज का जीवन परिचय के बारे में बताया था आज मैं आपको एक ऐसे संत के बारे में जिनके भक्तों की बात करूं तो एप्पल फाउंडर स्टीव जॉब्स उनके भक्त थे जो महीने भर से ज्यादा उनके सानिध्य में रहे इसी तरीके से विदेश की कई सेलिब्रिटीज जो है उन्हें दिव्य पुरुष मानती थी।
फेसबुक के मालिक मार्क जकरबर्ग उनका भी नाम आता है और तमाम कई हस्तियाँ हैं जिनका मानना है कि इस धाम की यात्रा करने के बाद उनका जीवन बदल गया वो कोई और नहीं उनका नाम है नीम करोली बाबा।
नीम करोली बाबा जिनका नाम सुनते ही भक्तों केमन में श्रद्धा उमड़ जाती है जिन्हें हनुमान जी का परम भक्त कहा जाता है और आज भी उनकी सिखाई बातों पर हम सब चल रहे हैं बाबा जी का जीवन चमत्कारों से भरा हुआ था।
बहुत सारी कथाएं उनके बारे में प्रचलित है कहा जाता है कि बिना कुछ कहे ही वह लोगों के मन की बातें समझ लेते थे परेशानियों का समाधान कर देते थे।
नीम करोली बाबा जिनका वास्तविक नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था उनके पिताजी का नाम दुर्गा प्रसाद शर्मा था 17 साल की उम्र में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई उन्होंने घर छोड़ दिया और अपना जीवन हनुमान जी की भक्ति में लगा दिया।
उत्तर भारत में साधुओं की तरह भ्रमण करने लगे उन्हें अलग-अलग नामों से बुलाया गया गुजरात के बवानिया मोरबी में जब उन्होंने तपस्या की तो लोग उन्हें तलैया बाबा के नाम से पुकारने लगे कहा जाता है कि जब वहउत्तराखंड के प्रवास पर थे भवाली से कुछ किलोमीटर आगे जाने के बाद बाबा एक छोटी सी घाटी के पास में रुके और सड़क किनारे जो पैरा पट बनी होती है।
बाबा नीम करोली जी का जीवन परिचय।
उस पर बैठ गए सामने पहाड़ी पर दिखाई दी एक आदमी को आवाज दी कि पूरण इधर आओ पूरण नीचे आया और कंबल लपेटे अजनबी से अपना नाम सुनकर के अचंभे में पड़ गया कि ये मुझे कैसे जानते हैं?
बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा कि घबराओ मत मैं तुम्हें पिछले कई जन्मों से जानता हूं मेरा नाम बाबा नीम करोली है हमें भूख लगी है हमारे भोजन की व्यवस्था करो पूरण ने घर जाकर के अपनी मां को बताया कि नीचे पैरा पट पर नीम करोली बाबा जी बैठे और भोजन मांग रहे हैं घर में दाल रोटी बनी थी पूरण की माता जी ने वही परोस दी।
बाबा जी ने भोजन के बाद पूरन से कहा कि गांव के दो तीन लोगों को लेकर आओ उन सब को लेकर के बाबा जी नदी के पार जंगल में गए और एक जगह पर कहा कि यहां पर खुदाई शुरू करो जब खुदाई शुरू हुई तो गुफा मिली और बाबा जी ने कहा कि गुफा में धुनि है खुदाई हुई तो ऐसा लगा कि गुफा में धुनी अभी-अभी किसी ने लगाई है।
धुनी के पास में चिमटा भी गड़ा हुआ था पूरन और गांव वाले हैरान थे कि उन्हें पूरी जिंदगी हो गई किसी को इस गुफा के बारे में पता नहीं था पत्थरों के नीचे गुफा धुनी और चिमटा हवन कुंड की जानकारी किसी साधारण व्यक्ति को तो नहीं हो सकती।
कंबल लपेटे कोई आम इंसान नहीं महापुरुष है लोग यही सोच रहे थे कि बाबा जी बोल पड़े हमारे पास कोई चमत्कार नहीं है चलो अब यहां हनुमान जी बैठेंगे बाबा जी ने नदी से पानी मंगवाया और स्थान का शुद्धीकरण किया साथ ही वहां कुटिया नुमा जगह बना दी।
बाबा नीम करोली जी का जीवन परिचय।
कुछ दिन बाद बाबा जी ने पूरण को बताया यह सोमवारी बाबा की तपस्थली है इसका पुनरुद्धार करना है यही कुटिया आज कैची धाम के रूप में विख्यात है कैची धाम की ओर जो सड़क जा रही है वो कैंची की तरह दो तीखे मोड़ जैसी दिखाई देती है इसलिए इस जगह का नाम कैची धाम रखा गया।
नीम करोली बाबा हनुमान जी को काफी ज्यादा मानते थे उन्होंने अपने जीवन में हनुमान जी के 108 मंदिरों को बनवाया नीम करोली बाबा के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने हनुमान जी की भक्ति कर कई सिद्धियां हासिल की वो किसी को भी अपने पैर नहीं छूने देते थे।
नीम करोली बाबा ये नाम कैसे रखा गया तो कहा जाता है कि एक बार नीम करोली बाबा बिना टिकट के फर्स्ट क्लास ट्रेन में सफर कर रहे थे टिकट चेकर ने बाबा के पास टिकट नहीं मिलने पर उन्हें अगले स्टेशन पर उतार दिया वो जगह जो थी वो नीम करोली थी।
ट्रेन से उतरने के बाद बाबाजी वहीं पर ही ट्रेन से कुछ दूर जाकर के जमीन पर बैठ गए अधिकारी ने ट्रेन आगे बढ़ने का इशारा किया लेकिन कमाल की बात यह थी कि ट्रेन 1 इंच भी आगे नहीं बढ़ी लंबे टाइम तक निरीक्षण करने के बाद जब कोई सलूशन नहीं मिला तो सब परेशान हो गए।
उस एरिया के मजिस्ट्रेट को जब इस घटना का ज्ञान हुआ तो उन्होंने अधिकारी से कहा कि बाबा जी से आप माफी मांगिए सम्मान पूर्वक ट्रेन में बिठाइये और ऐसा करते ही ट्रेन चल पड़ी तभी से इनका नाम नीम करोली बाबा पड़ गया।
बाबा नीम करोली जी का जीवन परिचय।
रिचर्ड अल्पर्ट हार्वर्ड में प्रोफेसर रहने के दौरान जो है रिसर्च के लिए 1967 में इंडिया आए यहां उनकी मुलाकात महाराज जी से होती है यानी कि नीम करोली बाबा से होती है बाबा जी उन्हें दीक्षा देते हैं और नया नाम रामदास देते हैं।
बाबा रामदास जी हनुमान जी के भक्त हो गए थे नीम करोली बाबा जी के भक्त हो गए थे और उन्होंने हनुमान जी की भक्ति को में रख कर के भक्ति योग सहित प्राचीन भारतीय परंपराओं को जो है आगे बढ़ाने का काम किया।
रिचर्ड अल्पर्ट ने अपनी किताब मिरेकल ऑफ लव पर बुलेट प्रूफ कंबल से जुड़ी एक घटना के बारे में बताते हैं वो कहते हैं कि बाबा के कई भक्तों में एक बुजुर्ग दंपति भी थी जो कि फतेहगढ़ में रहते थे यह घटना जो है कुछ ऐसी है कि एक दिन बाबा जी बुजुर्ग दंपति के घर पहुंच गए इसके बाद बाबा जी ने कहा कि रात्रि विश्राम यही करूंगा।
बाबा जी की बात सुनकर बुजुर्ग दंपति भक्त को बहुत खुशी हुई लेकिन वो बुजुर्ग दंपति जो गरीब थे और सोचने लगे कि अगर बाबा जी रुके और सत्कार सेवा के लिए तो कुछ है, पैसा नहीं है क्या होगा कैसे सेवा करेंगे उनके पास जो कुछ भी था उन्होंने बाबा जी को दे दिया उनका सत्कार किया भोजन के बाद उन्होंने बाबा जी को सोने के लिए चारपाई दी ओड़ने के लिए कंबल दिया जिसे ओढ़ कर के बाबा जी सो गए।
इसके बाद बुजुर्ग दंपति भी बाबा जी के जो चारपाई थी उसके पास ही सो गए बाबा कंबल ओढ़ कर के सो रहे थे और ऐसे चिल्ला रहे थे जैसे उन्हें कोई मार रहा है वो जो सोचने लगे कि बाबाजी को आखिर क्या हो गया जैसे तैसे रात बीती और सुबह हो गई।
बाबा नीम करोली जी का जीवन परिचय।
बाबा जी ने सुबह वो जो कंबल था वो लपेट कर के बुजुर्ग दंपति को दे दिया और कहा कि जाओ इसे जाकर के गंगाजी में प्रवाहित कर दो लेकिन खोल कर के मत देखना वरना मुसीबत में फंस जाओगे बाबा जी ने भी कहा कि आप चिंता मत कीजिए आपका बेटा महीने भर के अंदर वापस आ जाएगा।
जी की कई बातों का पालन करते हुए जब वो उस कंबल को गंगा जी में प्रवाहित करने के लिए ले जा रहे थे तो उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि इसके अंदर कुछ लोहे जैसा सामान है लेकिन बाबाजी ने तो खाली कंबल दिया था और मना भी किया था कि आपको देखना नहीं है तो उनके आदेश का पालन किया वैसे ही उस कंबल को प्रवाहित कर दिया।
बाबा जी के कहे अनुसार एक महीने बाद बुजुर्ग दंपति का बेटा बर्मा फ्रंट से युद्ध में गया हुआ था वहां से घर लौट आया ये उन का इकलौता बेटा था जो कि ब्रिटिश फौज में सैनिक था और सेकंड वर्ल्ड वॉर के टाइम बर्मा फ्रंट पर तैनात था बेटे को घर पर देख कर के बुजुर्ग दंपति खुशी का ठिकाना नहीं था लेकिन बेटे ने जो बताया उसने सबको हैरान कर दिया बेटे ने कहा कि लगभग महीने भर पहले एक दिन वो दुश्मनों के बीच में गिर गया था रात भर गोली बारी चलती रही उसके बाकी साथी मारे गए लेकिन वह अकेला बच गया।
बाबा नीम करोली जी का जीवन परिचय।
बेटे ने कहा कि मैं अकेला कैसे बच गया चमत्कार कैसे मुझे मालूम ही नहीं है खूब गोलीबारी हुई लेकिन एक भी गोली मुझे नहीं लगी रात भर वो दुश्मनों से लड़ता रहा और जिंदा बच गया ये वही रात थी जिस रात नीम करोली बाबा बुजुर्ग दंपति के घर आए थे और बुजुर्ग दंपति ये सारा चमत्कार समझ चुके थे कि क्यों उन्होंने कहा था कि कंबल को ले जाकर के गंगा जी में प्रवाहित कर दो, यही कारण है कि अपनी किताब मिरेकल ऑफ लव में रिचर्ड अल्पर्ट ने इस कंबल को बुलेट प्रूफ कंबल कहा है।
दूसरा किस्सा उस किताब में ये है कि एक बार कैची धाम में भंडारा चल रहा था लेकिन अचानक से वहां घी कम पड़ गया लोग परेशान हो रहे थे कि अबक्या करें जब बाबा जी को ये बात पता चली तो उन्होंने कहा कि नदी से जो है घी के कनस्तर में पानी भर कर लाइए लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि बाबा जी ऐसा क्यों कह रहे हैं और इसका घी से क्या संबंध है लेकिन वही किया जो बाबा जी ने कहा था।
पानी भर कर लाने के बाद बाबा जी ने कहा जाओ जाकर इसको कढ़ाई में डाल दीजिए जैसे ही कढ़ाई में डाला पानी घी में बदल गया सब बाबा जी का चमत्कार देख कर के हैरान रह गए।
बाबा नीम करोली जी का जीवन परिचय।
11 सितंबर 1973 की रात्रि थी बाबा जी वृंदावन में थे तबीयत उनकी खराब हो चुकी थी हॉस्पिटल में एडमिट करवाया गया कहते हैं कि डॉक्टर्स उन्हें ऑक्सीजन मास्क लगा रहे थे बाबा जी ने मना कर दिया उन्होंने भक्तों से कहा कि अब मेरे जाने का समय आ चुका है उन्होंने तुलसी जी गंगाजल को ग्रहण किया और रात्रि में करीब सवा बजे अपना शरीर त्याग दिया उनकी मृत्यु का कारण जो है मधुमेह कोमा बताया जाता है।
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