पढाई ही वह माध्यम है जिससे आप अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हो।

हैल्लो दोस्तों आप सभी को नये साल की हार्दिक शुभकामनाएं और आशा करता हूँ कि आप नये सिरे से अपनी पढाई पे फोकस करोगे क्योंकि आज के समय में पढाई ही वह माध्यम है जिससे आप अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हो, इसलिए अगर आज यदि तुम्हें पढ़ने का मन नहीं करता तो अपने मां-बाप का चेहरा याद करो अगर आलस आए तो अपने भविष्य की हालत सोचो। पढ़ाई सिर्फ किताब नहीं है, यह वो रास्ता है जो तुम्हें मजबूरियों से बाहर निकाल सकता है।
इसको एक कहानी के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं :-
एक छोटे से गाँव में पिंकू नाम का एक साधारण सा लड़का था जो बहुत सुस्त रहता था अपनी कक्षा में क्योंकि स्कूल में उसकी पहचान बस इतनी थी कि पास हो जाता है ना टीचर उसे याद रखते थे ना दोस्त उससे कुछ उम्मीद करते थे। घर की हालत कमजोर थी। पिता छोटी सी दुकान चलाते थे। मां सिलाई करके घर संभालती थी।
पिंकू रोज देखता था कि उसके मां-बाप कितना थकते हैं। फिर भी चेहरे पर मुस्कान रखते हैं। पिंकू को पढ़ाई से नफरत नहीं थी पर तड़प भी नहीं थी। किताब खोलता तो मन भटक जाता। मोबाइल, दोस्त, नींद सब ज्यादा प्यारे लगते वह सोचता था जैसे तैसे जिंदगी चली जाएगी।
एक दिन स्कूल से लौटते वक्त उसने देखा उसके पिता दुकान पर किसी से उधार मांग रहे थे। आवाज धीमी थी। पर शब्द चुभने वाले। बस इस महीने तक दे दीजिए। बेटे की फीस भरनी है। पिंकू वहीं खड़ा रह गया। उसे पहली बार लगा कि उसकी पढ़ाई सिर्फ किताब नहीं, किसी का आत्मसम्मान भी। उस रात वह पढ़ने बैठा पर दिमाग नहीं चला। किताब सामने थी पर आंखों में पिता का झुका हुआ सिर घूम रहा था।
पढाई ही वह माध्यम है जिससे आप अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हो।
पहली बार उसे पढ़ाई ना करने का डर लगा। कुछ दिनों बाद परीक्षा आई। रिजल्ट आया। फिर वही औसत नंबर। टीचर ने कॉपी लौटाते हुए कहा पिंकू तुम अगर मेहनत कर लो तो बहुत आगे जा सकते हो पर लगता नहीं कि तुम्हें फर्क पड़ता है।
एक श्याम मां सिलाई करते करते बोली बेटा तू बस पढ़ ले। हमें कुछ नहीं चाहिए। हम जैसे हैं वैसे ही खुश हैं। मां ने यह मुस्कुरा कर कहा पर आंखों में थकान साफ थी। पिंकू उस रात सो नहीं पाया। पहली बार उसके अंदर से आवाज आई। अगर मैं नहीं बदला तो यही जिंदगी हमेशा रहेगी।
अगले दिन उसने एक फैसला किया। कोई दिखावा नहीं, कोई घोषणा नहीं। बस रोज खुद से एक वादा आज मैं अपनी पूरी ताकत से पढूंगा। पहले दिन मन नहीं लगा। दूसरे दिन भी मुश्किल हुई। तीसरे दिन सिर दर्द हुआ, लेकिन उसने हार नहीं मानी।
जब दोस्त खेलने बुलाते, वो मना करता। जब नींद आती वह चेहरा धोकर फिर बैठ जाता। जब मन कहता कल पढ़ेंगे वह जवाब देता कल नहीं अभी। धीरे-धीरे किताबें डराने वाली नहीं रही। धीरे-धीरे सवाल समझ आने लगे और सबसे बड़ी बात पढ़ाई अब बोझ नहीं। उम्मीद बन गई। एक दिन पिता ने कहा बेटा आजकल बहुत पढ़ रहा है। सब ठीक तो है। पिंकू बोला हां पापा अब ठीक होना है। महीने बीते परीक्षा आई। इस बार रिजल्ट अलग था। पिंकू के नंबर अच्छे थे।
पढाई ही वह माध्यम है जिससे आप अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हो।
टीचर ने सबके सामने कहा, यह वही पिंकू है जिसने खुद को बदल लिया। घर आकर उसने मां के हाथ में रिजल्ट रखा। मां की आंखों में आंसू थे। पर इस बार दुख के नहीं। पिता ने कुछ नहीं कहा। बस सिर पर हाथ रखा। उस स्पर्श में वो सब था जो शब्द नहीं कह पाते। उस रात पिंकू ने किताब खोली।
अब मजबूरी में नहीं डर से नहीं बल्कि इस तड़प से कि मुझे इस परिवार की तकदीर बदलनी है और सच यही है जिस दिन पढ़ाई नंबरों के लिए नहीं जिम्मेदारी के लिए होती है उस दिन इंसान बदल जाता है।
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