अपने मन को नियंत्रित करने के लिए वर्तमान में जीना सीखिये।

दोस्तों मन को नियंत्रित करना कोई एक दिन का काम नहीं है, यह रोज का अभ्यास है। जैसे शरीर को रोज भोजन चाहिए वैसे ही मन को रोज अच्छे विचार भी चाहिए। अगर आप मन में गुस्सा, जलन और शिकायतें भरते रहेंगे, तो आत्मा का प्रकाश मंद पड़ जाएगा लेकिन अगर आप मन को प्रेम और विश्वास से सींचेंगे तो हर परिस्थिति में आपके मन में उजाला ही रहेगा क्योंकि जीवन का असली आनंद तब आता है जब हम वर्तमान में जीना सीखते हैं।
जो बीत गया उसके पछतावे और भविष्य की चिंताओं के बीच वर्तमान ही वह पल है जिसमें जीवन बसा होता है। कृष्ण हमें यही सिखाते हैं कि कर्म करो। फल की चिंता मत करो। यानी यह पल, यह काम, यही तुम्हारा धर्म है। इसे पूरी निष्ठा से करो। बाकी सब अपने आप ठीक हो जाएगा।
दोस्तों, हमारा मन अक्सर यह तुलना करता रहता है कि वो मुझसे ज्यादा सफल है। उसकी जिंदगी ज्यादा अच्छी है लेकिन तुलना से कभी खुशी नहीं मिलती। अपने धर्म का पालन करो दूसरों के धर्म में दखल मत दो क्योंकि हर व्यक्ति की राह अलग है। जो राह तुम्हारे लिए बनी है, वही तुम्हें तुम्हारे सत्य तक ले जाएगी। इसके अलावा इंसान को क्षमाशील होना चाहिए।
किसी को माफ कर देने से आप भी उस तकलीफ से बाहर निकल आते हैं क्योंकि जब तक दिल में गुस्सा है तब तक शांति असंभव है। जिस दिन आप किसी को सच्चे दिल से माफ करते हैं, उसी दिन आप अपनी आत्मा को आजाद कर देते हैं।
अपने मन को नियंत्रित करने के लिए वर्तमान में जीना सीखिये।
दोस्तों, खुश रहना यह नहीं कि जीवन में कठिनाइयां खत्म हो जाए बल्कि यह समझना है कि हर कठिनाई में कोई ना कोई संदेश छिपा हुआ है। हालात हमें मजबूत बनाने आते हैं। कभी हमें विनम्र बनाना सिखाने आते हैं। अगर हम उन्हें सीख की तरह स्वीकारें तो वह वरदान बन जाते हैं।
महाभारत में श्री कृष्ण अर्जुन से कहते हैं जो मनुष्य अपने कर्तव्य से भागता है वह अपने विकास से ही भागता है। जीवन का हर संघर्ष हमें हमारे भीतर की शक्ति दिखाने का अवसर देता है। जब तूफान आता है तो पेड़ झुकता है लेकिन टूटता नहीं। ठीक वैसे ही जब हम भीतर से मजबूत होते हैं तो कोई भी तूफान हमें गिरा नहीं सकता।
खुशी का दूसरा नाम संतुलन है। जब हम अपनी इच्छाओं और वास्तविकताओं के बीच पुल बना लेते हैं। तभी जीवन मधुर बनता है। कई लोग कहते हैं कि जब सब कुछ ठीक होगा तभी मैं मुस्कुराऊंगा पर सच्चाई यह है जब आप मुस्कुराना शुरू करेंगे तब सब कुछ ठीक होने लगेगा क्योंकि संसार वैसा ही दिखता है जैसी आपकी दृष्टि होती है। अगर दृष्टि में आशा है तो हर अंधेरा भी दीपक बन जाएगा।
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