• Skip to primary navigation
  • Skip to main content
  • Skip to primary sidebar

Gyan Kiya

जीवन में मदद से बड़ा कोई कर्म नहीं और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं 🙏🙏

  • Home
  • Education
  • Knowledge
  • Motivation
  • Sports
  • Health
  • Tech
  • Entertainment

मरने के बाद शव को अकेले क्यों नहीं छोड़ा जाता?

December 18, 2025 by Gyan Kiya 1 Comment

मरने के बाद शव को अकेले क्यों नहीं छोड़ा जाता?

मरने के बाद शव को अकेले क्यों नहीं छोड़ा जाता?

हम सब जानते हैं जैसे दिन के बाद रात होता है, ऐसे ही जीवन और मृत्यु भी इस लोक की सच्चाई है। यह अटल सत्य है कि जिसने भी जन्म लिया है उसे एक ना एक दिन धरती लोक को छोड़ना होगा। यदि पृथ्वी लोक पर कुछ सच है तो वह केवल मृत्यु है लेकिन फिर भी हम और आप मौत से डरते हैं और इस सच्चाई को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं और शायद यही वजह है कि मृत्यु से जुड़ी परंपराएं, रीति-रिवाज और मान्यताएं हमेशा से लोगों में उत्सुकता और रहस्य पैदा करते हैं।

आपने देखा होगा कि हिंदू धर्म में मृत्यु के बाद शव का दाह संस्कार किया जाता है लेकिन जब किसी की मृत्यु सूर्यास्त के बाद होती है तो आपने गौर किया होगा कि उसके दाह का संस्कार तुरंत नहीं होता उसे रात भर रखा जाता है और फिर अगले दिन उसका दाह संस्कार होता है और उसमें भी सबसे दिलचस्प चीज जो आपने देखी होगी वो यह कि शव को कभी भी अकेले नहीं छोड़ा जाता। क्या कभी आपने सोचा कि ऐसा क्यों? शव को अकेले छोड़ना इतना बड़ा जोखिम क्यों माना गया?

हिंदू धर्म की मान्यताओं में सूर्यास्त के बाद दाह संस्कार मना है। गरुड़ पुराण यह कहता है कि सूर्यास्त के बाद किसी मृत शरीर को अग्नि दी जाए तो उसे मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। सूर्यास्त के बाद का समय देवताओं का नहीं बल्कि नकारात्मक शक्तियों का माना गया है इसी वजह से रात में अग्नि संस्कार को अशुभ माना जाता है। यही वजह है कि अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु शाम के बाद हो जाए तो उसका शव घर पर रखा जाता है और फिर सुबह होने का इंतजार किया जाता है।

मरने के बाद शव को अकेले क्यों नहीं छोड़ा जाता?

दूसरी स्थिति पंचक की होती है यदि किसी की मृत्यु पंचक काल में होती है तो भी उसका दाह संस्कार तत्काल नहीं हो गया था। पंचक समाप्ति होने पर अग्नि दी जाती है। गरुड़ पुराण के अनुसार पंचक में मृत्यु होने पर सीधे दाह संस्कार करने से परिवार में और पांच लोगों की मृत्यु होने के योग बनते हैं, इसीलिए पंचक में मृत्यु होने पर भी शव को कुछ समय के लिए घर में रखा जाता है ऐसी मान्यता है।

अब सवाल अकेला क्यों नहीं छोड़ आता? जो सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है कि शव हम रात भर अकेले क्यों नहीं छोड़ते?

एक पुराणों में कहा गया है कि यदि शव को अकेला छोड़ दिया जाए तो कई बारउसे जानवर क्षति पहुंचाते हैं यदि शव के शरीर को जानवर नोच लें या परेशान करें तो फिर आत्मा को परलोक मार्ग नहीं मिलता। उसे वहां भी कष्ट सहने पड़ते हैं। घर में भी मच्छर, कीड़े-मकोड़े अगर हो, इसीलिए आपने देखा होगा कि शीशे में रख देते हैं या बगल में धुआं जला देते हैं ताकि इन्सान की आत्मा को अत्यंत पीड़ा न सहने पड़े इसलिए होता है।

दूसरा शव में गंध उत्पन्न होना। रात में वातावरण शांत स्थिर होता है। शवको अकेला छोड़ देने पर उससे दुर्गंध उठने लगती है। इसलिए उसके आसपास धूप अगरबत्ती जलाई जाती है ताकि वातावरण शांत और पवित्रबना रहे। यह परंपरा सिर्फ धार्मिक ही नहींबल्कि व्यवहारिक तौर पर भी है और मुख्य है नकारात्मक शक्तियों का भय। जैसा कि हमने बताया गरुड़ पुराण स्पष्ट कहता है कि मृत्यु के तुरंत बाद शरीर ऊर्जा से रिक्त हो जाता है। आसपास भटक रहे पिशाच दुष्ट आत्माएं नकारात्मक शक्तियां मृत शरीर में प्रवेश कर सकती हैं।

मरने के बाद शव को अकेले क्यों नहीं छोड़ा जाता?

यदि शव लंबे समय तकअकेला पड़ा रहा तो उन दुरात्माओं को उसशरीर पर अधिकार जमाने का अवसर मिल जाएगा।जिससे मृत आत्मा के साथ-साथ उसके परिवारवालों को भी कष्ट झेलने पड़ सकते हैं। ऐसीमान्यता है। एक और मान्यता है मृतक कीआत्मा का भटकने को लेकर। गरुड़ पुराण केअनुसार मृत्यु के बाद आत्मा तुरंत दूरनहीं होती। वो कुछ समय तक अपने शरीर केआसपास रहती है। ऐसी मान्यता है कि मृतक कीआत्मा अपने परिजनों को देख रही होती है।उन्हें पुकार रही होती है और धीरे-धीरे वोयह समझ रही होती है कि वह दुनिया से जारही है।

यदि शव बिल्कुल अकेला रह जाए तो आत्मा अत्यधिक बेचैन हो सकती है। उसके आगेका मार्ग बाधित हो सकता है। पुराणों में यह भी उल्लेख है कि जिस प्रकार खाली मकान में अनचाहे लोग घुस जाते हैं। उसी प्रकार बुरी आत्माएं ना घुसने इसलिए शव के पास दीपक, धूप, मंत्रोचार और किसी व्यक्ति की उपस्थिति अनावश्यक मानी गई है ताकि नकारात्मक शक्तियां दूर रहे। गरु पुराण में विष्णु जी बताते हैं कि यदि मृतक की अपनी संतान दूर हो उपस्थित ना हो तो शव को तब तक घर में रखा जाता है जब तक उसका पुत्र या निकट संबंधी मुखाग्नि ना दे।

मरने के बाद शव को अकेले क्यों नहीं छोड़ा जाता?

यदि संतान के द्वारा मुखाग्नी नहीं दी गई तो मृत आत्मा का उद्धार अधूरा रह जाता है। उसे कई वर्षों तक मृत्यु लोक भटकना पड़ता है यही कारण है कि लोग दूर-दूर से भी अंतिम संस्कार में पहुंचने की कोशिश करते हैं क्योंकि यह सिर्फ एक रस्म नहीं आत्मा की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। पुराणों में कहा गया कि सूर्यास्त के बाद किए गए दाह संस्कार से आत्मा असुर, पिशाच या दानव योनि में जन्म ले सकती है क्योंकि रात का समय दैविक ऊर्जा का नहीं बल्कि तामसिक शक्तियों का है इसीलिए धार्मिक दृष्टि से नहीं आध्यात्मिक दृष्टिसे भी रात का समय संस्कार के लिए सही समयनहीं माना जाता है।

शव के आसपास बैठना एक परंपरा नहीं यह मृत आत्मा को संरक्षण देने का एक तरीका है। मनुष्य की मृत्यु के बाद उसके और परलोक के बीच की दूरी को सिर्फ सांसों भर की होती है। इस संक्रमण काल में यदि परिवार वाले मंत्र जप, दीपक और धूप जलाकर बैठते हैं तो यह वातावरण को पवित्र रखते हैं और आत्मा को शांत रखते हैं।

कुल मिलाकर कहें तो मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य हैऔर मृत्यु से जुड़ी परंपराएं सिर्फ अंधविश्वास नहीं बल्कि गहरी आध्यात्मिक समझ पर आधारित है। शव को रात में अकेले ना छोड़ना यह मृत आत्मा की सुरक्षा परिवार की शांति और नकारात्मक शक्तियों से बचाव का तरीका है।

Read Previous Post

इस दुनियाँ में जितने भी प्राणी है वो सब अनमोल हैं।

Filed Under: Knowledge Tagged With: मरने के बाद शव को अकेले क्यों नहीं छोड़ा जाता?

Reader Interactions

Trackbacks

  1. जिंदगी में इन कुछ आदतों को बदलना जरुरी। - Gyan Kiya says:
    December 19, 2025 at 8:43 pm

    […] […]

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Primary Sidebar

Search Here

Calendar

April 2026
M T W T F S S
 12345
6789101112
13141516171819
20212223242526
27282930  
« Jan    

Categories

  • Education (8)
  • Entertainment (2)
  • Health (8)
  • Knowledge (5)
  • Motivation (36)
  • Sports (2)
  • Tech (2)
  • Uncategorized (1)

Recent Posts

  • अपने माँ-बाप का जीवन में हमेशा सम्मान करना चाहिए।
  • समस्या आने पे डरे नहीं बल्कि उसका समाधान ढूंडने का प्रयास कीजिये।  
  • खुशियों को बांटना शुरू कीजिए बड़ा सुकून मिलेगा।
  • जीवन में किसी का अहित नहीं सोचना चाहिए।
  • पढाई ही वह माध्यम है जिससे आप अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हो।

Recent Comments

  • NikitaTak on भगवान संकट में जरुर साथ देते हैं बस भरोसा होना चाहिए।
  • SarahTak on भगवान संकट में जरुर साथ देते हैं बस भरोसा होना चाहिए।
  • समस्या आने पे डरे नहीं बल्कि उसका समाधान ढूंडने का प्रयास कीजिये।   - Gyan Kiya on खुशियों को बांटना शुरू कीजिए बड़ा सुकून मिलेगा।
  • खुशियों को बांटना शुरू कीजिए बड़ा सुकून मिलेगा। - Gyan Kiya on जीवन में किसी का अहित नहीं सोचना चाहिए।
  • जीवन में किसी का अहित नहीं सोचना चाहिए। - Gyan Kiya on पढाई ही वह माध्यम है जिससे आप अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हो।

Copyright © 2025 Gyan Kiya