भगवान का हमेशा नाम जप करते रहिये।

हम कई बार ऊपर वाले को कोसने लगते हैं कि मेरे साथ ही क्यों हो रहा है। हम भूल जाते हैं कि भगवान का जो प्लान है वो हमारे प्लान से कहीं ज्यादा अच्छा होता है।
एक बड़ी छोटी सी कहानी एक महात्मा जी की जिन्हें एक दिन भगवान ने आकाशवाणी के माध्यम से बताया कि अब से एक साल बाद तुम्हारी गर्दन तलवार से कट जाएगी जैसे ही उन्हें आकाशवाणी हुई महात्मा जी गदगद हो गए और भगवान को प्रणाम करने लगे। आंखों से आंसू बहने लगे और कहने लगे कि हे प्रभु आप कितने दयालु हैं। आपने एक साल पहले बता दिया कि एक साल बाद मेरी गर्दन कटने वाली है। यानी एक साल का समय बचा है। मैं नाम जपू सुमिरन करूंगा।
आपका नाम जपता ही चला जाऊंगा। एक क्षण भी व्यर्थ नहीं करूंगा। मुझे एक साल पहले जगाने के लिए चेतावनी देने के लिए। बहुत-बहुत धन्यवाद। उनका आश्रम था। आश्रम में भक्त आया करते थे। महात्मा जी ने सोचा कि भक्त आएंगे तो बात भी करेंगे तो महात्मा जी ने एक डायलॉग बना लिया। वो लाइन थी उसकी मौत से अच्छा हुआ। जैसे कोई भक्त आता आकर के कहता है कि अरे वहां अकाल पड़ गया।
महात्मा जी कहते उसकी मौत से अच्छा हुआ। कोई कहता वहां ज्यादा बारिश हो गई। बोले उसकी मौत से अच्छा हुआ। कोई कहता मेरे खेत में बढ़िया फसल हुई। बोले उसकी मौत से अच्छा हुआ। कोई कहता कम जो है फसल हुई। महाराज कहते हैं उसकी मौत से अच्छा हुआ। लोग सोचते हैं तो एक ही बात कहते हैं। उनको लगा ठीक है कह रहे हैं तो सब सही कह रहे हैं।
भगवान का हमेशा नाम जप करते रहिये।
एक भक्त था उनके आश्रम में प्रतिदिन आता था, सेवा करता था, भोजन बनाता था, साफ सफाई रखता था। महात्मा जी का बहुत अच्छे से ध्यान रखता था। परम भक्त था। एक दिन वो भक्त आया और आकर के कहने लगा शाम के समय उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। बोला महाराज आज सुबह मेरा बच्चा बीमार हुआ और दोपहर होते उसकी जान चली गई।
महात्मा जी को अंदर दुख तो बहुत हुआ। पीड़ा तो बहुत हुई लेकिन एक ही लाइन बोलते थे तो बोल दी। उसकी मौत से अच्छा हुआ। वो जो भक्त था क्रोध में वहां से उठकर के चला गया। पूरे रास्ते सोचता रहा कि जिनके यहां दिन रात सेवा करते हैं। घर परिवार छोड़ के इनकी सेवा में रहते हैं। फिर भी यह कह रहे हैं मेरे बच्चे के चले जाने पर कि उसकी मौत से अच्छा हुआ।
इन महाराज को तो सबक सिखाना पड़ेगा। कल सुबह-सुबह देख लूंगा। सुबह के समय महात्मा जी जो थे नदी किनारे टहलने के लिए जाते थे। और महात्मा जी का प्रतिदिन का यही रूटीन था। उस भक्त को पता था कि सुबह-सुबह घूमने के लिए आएंगे। भोर का समय ब्रह्म मुहूर्त का जब हल्का सा अंधेरा रहता है। महात्मा जी टहलने के लिए जब पहुंचे वो जो भक्त था जो परम भक्त था वो झाड़ी में छुप करके बैठ गया।
भगवान का हमेशा नाम जप करते रहिये।
हाथ में तलवार ले रखी थी कि जैसे ही आएंगे गर्दन उड़ा दूंगा। फिर बताऊंगा उसकी मौत से कैसा हुआ। महात्मा जी टहलते टहलते आगे बढ़े। उस झाड़ी के पास पहुंचने वाले थे कि रास्ते में कील जो थी उनके पैर में घुसी और आरपार हो गई। खून का फव्वारा फूट गया। खून ही खून बह गया। महात्मा जी वहीं नीचे बैठ गए। दर्द से चिल्लाने लगे। भगवान भगवान। दौड़ा भागा भक्त आया। मन में तो दया थी। कि महात्मा जी के साथ यह क्या हो गया? तलवार तो वहीं छोड़ दी झाड़ी में। दौड़ा भाग आया। आकर के कहने लगा महात्माजी ये क्या हो गया? अब भक्त को लग रहा था आप नहीं बोलेंगे उसकी मौत से अच्छा हो। महात्मा जी ने तो वही लाइन बोल दी बेटा उसकी मौत से बहुत अच्छा हुआ।
उस भक्त ने कहा हो क्या गया आपको? आपके पैर में कील घुस गई है। टिटनेस का इंजेक्शन लगवाना पड़ सकता है। खून का फव्वारा फूट गया है। और आप कह रहे हैं उसकी मौत से अच्छा हुआ। आपका पैर काटना पड़ सकता है। महात्मा जी ने कहा बेटा तुम नहीं समझोगे। अब से एक साल पहले मुझे आकाशवाणी हुई थी। बताया गया था कि एक साल बाद तुम्हारी गर्दन तलवार से कटने वाली है।
भगवान का हमेशा नाम जप करते रहिये।
बेटा यह तो अच्छा हुआ कि वो काल जो था यहीं पर ही समाप्त हो गया। उसकी मौत से बहुत अच्छा हुआ। वो भक्त चौंक गया। बोले महाराज आपको कैसे पता? मैं ही तो था जो आपकी गर्दन तलवार से काटने वाला था। झाड़ी में छुप करके बैठा था। तलवार वहीं झाड़ी में पड़ी है। महात्मा जी ने कहा तुम्हारी हिम्मत है मुझे छूने की। तुम नहीं थे। वह काल था जो तुम्हारे अंदर आकर के बैठा था जिसने तुम्हें प्रेरित किया था कि गर्दन काट दो। लेकिन भगवान के नाम जप की ताकत देखो, शक्ति देखो कि कील आरपार होकर के रह गई।
अगर यह पैर भी काटना पड़ जाता तो को ईबात नहीं। मुझे जीवन मिल गया, समय मिल गया। भगवान का और नाम जप कर लूंगा।
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