भगवान संकट में जरुर साथ देते हैं बस भरोसा होना चाहिए।

जो आपकी तारीफ करता है वह आपकी स्थिति को देखता है और जो आपकी चिंता करता है वह आपकी परिस्थिति को देखता है क्योंकि हम में से कई लोग सवाल उठाने लगते हैं कि ऐसा कुछ होता थोड़े ही न होता है भगवान होते ही नहीं है भूल जाते हैं कि हम सब उन्हीं की संताने हैं यह सृष्टि उन्हीं के चलाने से चल रही है बस भरोसा होना चाहिए।
आइये इसको एक कहानी के माध्यम से समझने का प्रयास करते हैं :-
एक प्रवीण नाम का दुकानदार था जो दवाइयों की शॉप लगाता था केमिस्ट था और 10 साल से इसी इंडस्ट्री में था इसी काम को कर रहा था तो उसे दवाइयों की बहुत अच्छी समझ थी और \ दुकान को अकेला संभालता था।
कस्टमर्स के बीच में बहुत अच्छा उसने ट्रस्ट डेवलप कर लिया था लेकिन उसकी एक आदत थी वो भगवान को नहीं मानता था उसके पिताजी उसे समझाते-समझाते दुनिया छोड़ के चले गए लेकिन वह समझ नहीं पाया कि भगवान होते हैं वो हमेशा ये कहता था सबसे कि भगवान जैसी कोई बात ही नहीं है भगवान होते ही नहीं है।
प्रवीण जब भी उसको खाली समय मिलता दोस्तों के साथ ताश खेलने में बैठ जाता था उसकी दुकान पर कई बार दोस्त आ जाते थे जब कोई नहीं होते ताश खेलना शुरू कर देते थे एक दिन ऐसे ही शाम का समय था उसके दोस्त आ गए शाम में थोड़ी भीड़ थी जब भीड़ कम हो गई कस्टमर्स चले गए तो दोस्तों ने कहा आओ भाई ताश शुरू करते हैं।
भगवान संकट में जरुर साथ देते हैं बस भरोसा होना चाहिए।
तभी बाहर बारिश शुरू हो गई अब बाहर बारिश हो रही थी दोस्त जा भी नहीं सकते थे घर पर दुकान पर कोई था भी नहीं था उन्होंने ताश खेलना शुरू कर दिया अब ताश खेल रहे थे तभी एक बच्चा जो है भीगता हुआ बारिश में दौड़ा चला आया।
अंकल-अंकल मुझे दवाई चाहिए और प्रवीण जो था ताश खेलने में इतना मशगूल हो रखा था कि उसका मन नहीं था कि ताश खेल करके उठे और उसको दवाई द लेकिन दोस्तों ने कहा कहा भाई कोई आया तुम उसकी मदद तो करो तो उठा अपनी जगह से गया उससे पूछा कौन सी दवाई चाहिए तो उसी समय पर वहां लाइट चली गई।
इसका मन जो था उदास हो गया कि पहले ही ताश नहीं खेल पा रहे हैं दूसरा लाइट चली गई दिमाग और खराब हो गया इसने कहा ये बच्चा क्या परेशान करने आ गया बोले क्या हो गया बोले मेरी मां बीमार है और सब दुकानें बंद हो रखी है बारिश में आप ही की दुकान खुली दिखी मुझे तो बड़ी उम्मीद है आप दवाई दे दीजिए मेरी मां को बचा लीजिए।
उसके बाद प्रवीन ने फटाफट से दवाई की शिशी ली और दे दी उसको और दोस्तों ने कहा भाई अब तो लाइट भी चली गई अब कहां से खेलेंगे हम भी निकलते हैं तो धीरे-धीरे करके दोस्त भी जाने लगे और तभी लाइट आ गई और जब लाइट आई और इसकी नजर पड़ी तो इसने अपना सिर पकड़ लिया इसने उस छोटे बच्चे को जो शीशी दी थी वो चूहे मारने की दवा थी।
भगवान संकट में जरुर साथ देते हैं बस भरोसा होना चाहिए।
जिस बीमारी की दवा देनी थी वो बोतल जो थी दवाई की वो तो वहीं रखी हुई थी इसका दिमाग खराब हो गया कि वो छोटा बच्चा पता नहीं कौन था कहां से आया था अपनी मां के लिए दवाई लेकर गया उसको तो पढ़ना भी नहीं आता होगा पता नहीं वो अपनी मां को दवाई ना दे दे चूहे मारने की दवा है उसकी माता जी दुनिया छोड़ के चली जाएंगी मैं 10 साल से इस बिजनेस को कर रहा हूं लोग क्या कहेंगे बहुत कुछ उसके दिमाग में चलने लगा।
उसको समझ नहीं आ रहा था क्या करूं फिर उसे याद आई पिताजी की वो बात जो पिताजी कहते थे दुकान में पीछे की तरफ घूमा तो वहां ऊपर की तरफ भगवान श्री कृष्ण जी की एक छोटी सी मूर्ति लगी हुई थी धूल लग गई थी उस पर क्योंकि ये तो पूजा पाठ करता नहीं था इसके पिताजी कहते थे कि कभी संकट आ जाए ना तू तो मानता नहीं भगवान को लेकिन संकट आ जाए तो एक बार बस हाथ जोड़ के प्रार्थना कर लेना सब समझा देंगे सब सुलझा देंगे एक बार इनको बोल देना।
प्रवीण को लगा अब तो कुछ ऑप्शन है भी नहीं यही है जो भी है हाथ जोड़ कर के आंखें बंद की ही थी बोल ही रहा था कि बचा लेना भगवान कभी मैंने माना नहीं आज मैं आपसे कह रहा हूं तभी वो बच्चा दौड़ते हुए आया कह रहा अंकल-अंकल वो मेरे को दूसरी बोतल चाहिए मेरे पास में पैसे नहीं लेकिन मुझे दूसरी शिशी दे दो।
भगवान संकट में जरुर साथ देते हैं बस भरोसा होना चाहिए।
प्रवीण उसके पास पहुंचा बोले क्या बात हो गई उस वाली बोटल का क्या हुआ तो बच्चा कि वो अंकल मैं घर पहुंचा ना तो आंगन गीला हो रहा था बारिश हो रही है ना तो मैं दौड़ते भागते जा रहा था मम्मी को जल्दी से दवाई देने के चक्कर में तो वो आंगन में मैं गिर गया और वो बोतल फूट गई सब दवाई बिखर गई तो प्रवीण ने कहा बस जाकर के उसको ना बाद में साफ कर देना और तुम चिंता मत करो मैं तुम्हें दूसरी बोतल देता हूं।
उस बच्चे ने कहा अंकल लेकिन पैसे नहीं मेरे पास प्रवीण ने कहा पैसे नहीं चाहिए बेटा तुम ले जाओ मम्मी को ठीक करो और कोई दिक्कत आए दवाई चाहिए हो आ जाना लेने के लिए प्रवीण फिर से भगवान के सामने गया हाथ जोड़ के बोला भगवान आप होते हैं क्योंकि भक्ति में शक्ति होती है मुझे आज समझ में आई मैं नास्तिक बना घूम रहा था आज आपने मेरी लाज बचा ली।
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