जीवन में अहंकार कभी भी नहीं करना चाहिए।

दोस्तों जीवन में अहंकार कभी भी नहीं करना चाहिए क्योंकि अहंकार जो है वो सब कुछ नष्ट कर देता है इसका उदारण है रावण। रावण के पास में जितना बड़ा साम्राज्य था उतना ही बड़ा उसका अहंकार था। रावण का सबसे बड़ा दोष उसका अतृप्त दहकता हुआ अहंकार था। उसे लगने लगा था कि संसार उसकी मुट्ठी में है और यही सोच उसको विनाश तक लेकर के आ गई।
रावण के बारे में कहते हैं कि घमंड जो है वो रावण को लेकर के डूब गया। जब प्रभु श्री राम से माता कौशल्या जी ने पूछा कि रावण को किसने मारा? तो राम जी ने कहा, मैंने मारा। तो कौशल्या जी कहने लगी हां तुम ही ने तो मारा। बोले नहीं मैंने उसके मैं ने उसके अहंकार ने उसे मार दिया। उसका अहंकार ही उसके विनाश का कारण बन गया।
एक और कथा है। अपनी शक्ति के अहंकार में रावण ने एक बार भगवान शिव जी के निवास कैलाश पर्वत को ही उठाने का प्रयास कर लिया था। वो कैलाश पर्वत को ही उठाना चाहता था। जब रावण अपनी नई जीती हुई लंका से वापस आ रहा था तो उसने कैलाश पर्वत पर भगवान शिव जी और मां पार्वती जी को देखा। जब नंदी ने उसे आगे जाने से रोका तो उसने क्रोध में आकर के नंदी जी का मजाक उड़ाया।
जीवन में अहंकार कभी भी नहीं करना चाहिए।
जिस पर नंदी जी ने एक बार तो उसे जो है वानर द्वारा लंका के नष्ट होने का श्राप दे दिया। इसके बाद रावण ने अपनी शक्ति दिखाने के लिए कैलाश पर्वत को उठा लिया। भगवान शिव जी क्रोधित हो गए। अपने पैर के अंगूठे से कैलाश पर्वत को दबाया जिससे रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया। वो दर्द से कराहने लगा, रोने लगा, चिल्लाने लगा और तब भगवान शिव जी की स्तुति में उसने शिव तांडव स्त्रोत जो है उसकी रचना की। जिससे प्रसन्न होकर के शिवजी ने जो है उसे वहां से मुक्त कर दिया और उसे रावण का नाम दिया।
रावण जिसका मतलब होता है भयंकर चीख वाला। रावण केवल खलनायक नहीं है बल्कि जीवन का जीने का पाठ भी सिखाता है। उसके जीवन में से कुछ अच्छाइयां ली जाए। कुछ बातें समझी जाए कि क्या हमें नहीं करना है तो हमारा जीवन आसान हो जाएगा।
Read Previous Post
[…] जीवन में अहंकार कभी भी नहीं करना चाहिए… […]