जीवन में असंभव कुछ नहीं होता ये सब परिकल्पनाएं हैं।

दोस्तों, कभी किसी की मत सुनो और ना ही कभी किसी पर विश्वास करो क्योंकि लोग कहते हैं कि तुम नहीं कर सकते, वह असंभव है लेकिन जीवन असंभव कुछ नहीं होता है ये सब परिकल्पनाएं हैं। आइये इसको विज्ञान के माध्यम से समझते है :-
डॉ. ली डे फॉरेस्ट एक महान वैज्ञानिक थे उन्होंने 1955 में एक बयान दिया था कि इंसान चाँद पर कभी नहीं पहुँच सकता है, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और एक इन्सान जिसका नाम था नील आर्मस्ट्रांग 1969 में चाँद पर पहुँच गया।
लॉर्ड केल्विन एक महान वैज्ञानिक थे उनका बयान था कि जैसे पक्षी उड़ सकते हैं, वैसे ही हवा से भारी मशीन को उड़ाना नामुमकिन है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण उसे गिरा देगा लेकिन साइकिल के स्पेयर पार्ट्स की मदद से इंसानों को चिड़िया बना दिया है। राइट ब्रदर्स को हवाई जहाज़ बनाने में 16 साल लगे थे।
विल्मा रूडोल्फ एक एथलीट थी जो पोलियो से पीड़ित थी जिसे पोलियो था कहती है कि मेरे डॉक्टर ने मुझे बताया कि तुम फिर कभी नहीं चल पाओगे और मेरी माँ ने मुझे बताया कि मैं चल पाऊँगी इसलिए मैंने डॉक्टर की बजाय अपनी माँ पर विश्वास किया जिसके बदले उसने 3 ओलंपिक स्वर्ण पदक जीते।
अल्बर्ट आइंस्टीन महान वैज्ञानिकों में से एक थे उन्हें मंदबुद्धि कहा जाता था। जब वे 8 साल के थे तो जिस स्कूल में वो पढ़ते थे वंहा के प्रिंसिपल ने उनकी माँ के लिए एक पत्र लिखकर भेजा जिसपे प्रिंसिपल ने लिखा था कि आपका बच्चा बहुत प्रतिभाशाली है।
जीवन में असंभव कुछ नहीं होता ये सब परिकल्पनाएं हैं।
उसके पास बहुत ताकत है जिसके कारण एक दिन वह महान वैज्ञानिक बनेगा और हमारा स्कूल, हमारा प्रबंधन, हमारे शिक्षक आपके बच्चे को अच्छी शिक्षा देने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए आपके लिए बेहतर है कि आप अपने बेटे का ध्यान रखें एवं उसे अपने घर में ही पढाया कीजिये।
यह पत्र पढ़ते समय उसकी माँ की आँखों में आँसू थे और उन्होंने कहा कि कल से तुम स्कूल नहीं जाओगे मैं तुम्हें घर पर पढ़ाऊँगी क्योंकि तुम्हारे शिक्षक को तुम्हारी क्षमता पर संदेह है।
जब अल्बर्ट आइंस्टीन की माँ का निधन हो गया और वे एक महान वैज्ञानिक बन गए तो एक दिन वो अपना घर बदल रहे थे तो उनको एक बॉक्स मिला जब उन्होंने वो खोला तो उसमे एक पत्र थे जो उनके प्रिंसिपल ने उनकी माँ को दिया था जब वो छोटे थे।
जब उन्होंने वह पत्र पढ़ा तो वह रोने लगे क्योंकि उस पत्र में लिखा था कि आपका बच्चा कमज़ोर दिमाग का है वह हमारे स्कूल के लायक नहीं है, उसे हमारे स्कूल में मत भेजो और उसे खुद पढ़ाओ लेकिन उनकी माँ ने उस पत्र को गलत पढ़ा यह बात उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा।
Read Previous Post
Leave a Reply